मित्रों!
वो सूरज से पहले उठता है,
धरती माँ के माथे का पसीना बनता है।
ना महलों का मालिक है,
ना दौलत का आशिक है,
फिर भी दुनिया का अन्नदाता � read more >>
सुहावनी सी सुबह हुई थी ,
दोस्त का साथ था ।
दिन जन्म अष्टमी का था ,
भक्त में राधे का था ।
जन्म दिन बहुतों का था ,
किसी का तारीख से तो किसी क read more >>