कहानी- "प्रतिशोध या प्रायश्चित?"
खण्ड- एक
कहानीकार- जितेन्द्र शर्मा
दिनांक- 10/01/2023
निवेदन- सम्मानित पाठकों! यह कहानी कुछ अधिक लम्बी � read more >>
आज की युवा पीढ़ी होने के नाते मैं कुछ खुद के अपने विचार लिख रही हु जैसा की सब को पता है आज आधुनिकता इतनी के जाता बड़ गई है की हमे हमारी जि� read more >>
स्वरचित रचना--- वह तो मजदूर है ....!
संदर्भ--- मजदूर
जिनकी पेशानी के बल पर
इस संसार की संरचना होती है।
ऐसे उन असंख्य मजदूरों की
पीड़ा में य read more >>
मेरी माँ के घर के दीपक से , ये सूरज फीका लगता है |
मेरी माँ के घर के आँगन से , मुझे यह शहर छोटा लगता है ||
हम लाख कमा ले दुनिया ज़हान की सारी दौल read more >>