मेरी माँ के घर के दीपक से , ये सूरज फीका लगता है |
मेरी माँ के घर के आँगन से , मुझे यह शहर छोटा लगता है ||
हम लाख कमा ले दुनिया ज़हान की सारी दौल read more >>
ताउम्र जिस घरौंदे को ,
संवारने में निकाल दी ।
सब उड़ चले मुझे भी,
निकलने की सलाह दी।
जाओ..... सब के सब
मर्जी तुम्हारी,
आंखों में दिख रही
ख� read more >>
कहानी- इच्छा मृत्यु
लेखक- जितेन्द्र शर्मा
08/01/2023
लाला कृपाराम भले आदमी थे। उनकी एक छोटे नगर में दैनिक उपयोग में आने वाली वस्तुओं की बडी read more >>