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खुश नहीं ,बेख़ौफ है । ये अभी जिंदगीं, की उडानों मैं इसे मिला है। अभी तो खुला आसमान अभी रखे कहाँ है। पाव जमीं पे देखे है ख्वाब अभी तो ।� read more >>
कहीं दीया जले कहीं दिल इए तो अपनी अपनी किस्मत है, खुदा जाने कब क्या हो यहां यहां तो वस उनकी ही रहमत है । read more >>
कहानी- "अनोखा बैर" लेखक- जितेन्द्र शर्मा ●●● गोवर्धन चौधरी और बालकिशन मिश्र एक दूसरे के जन्मजात पड़ोसी थे। एक दूसरे के सुख-दुख में read more >>
★★★★★★★★★★★★★★★★★★★★ *प्रेरणास्पद कथायें..✍🏻* *"एक गिलास पानी"* 💐सपनों का सौदागर......करण सिंह💐 ★★★★★★★★★★★★★★★★★★★★ *सरकारी � read more >>
उदय चाह अधिनस्त्त ज्ञान, उम्मिदें बल बन जात्ता हैं! शीक्क्षा बिन सार अधुरा हैं, शीक्क्षा सम्मान दिलात्ता हैं!! अचल चाह अवि� read more >>
क्या क्या अभिनय कर रहा, इनके रूप हजार। रखवाला का साथ है, बेशुमार है प्यार।। क्या क्या अभिनय कर रहा,जग का पालनहार। नाश झूठ का है सदा, चा read more >>
मन में रखिए आप सब, सुन्दर सुन्दर ख्याल। तभी मिलेंगें हर खुशी, ठीक रहे तब काल।। ठीक रहे जब काल नित,मिलता है उपहार। खुशियां ही खुशियां रह read more >>
होना भी तो चाहिए,पड़ा जेब में नोट। सब ही इच्छा पूर्ण हो, करूं खुशी से वोट। फिर तो सबका साथ हो,मिलती विजय हजार_ देवलोक है तब धरा, रहे नहीं read more >>
अपने लिए तो हर कोई जीता औरों के लिए तो जी के देखो। अमृत की इच्छा तो हर कोई करता औरों को एक घूँट पिलाके तो देखो। खड़ा हिमालय बाहें फैलाए read more >>
दिनाक→ (07/12/2022) बुधवार, शायरी→ जलने वालों को अलविदा ही ठीक हैं। शायार→ मोहम्मद फैजान सिद्धिकी'' पिता-रईस अहमद सिद्धिकी'' अजी जानाब ह� read more >>
जन्म से कोरा मानव, देख जगत का रंग। लोक रंग में उम्र भर, कई सपनें-सजाए। खूब कमाएं शोहरत, भरा रत्नें शबाब। ज्ञान विवेक ना अनुभव, रहा बन-श read more >>
दुनिया में- झूठ चले बिना पैर, मन फ़िरे लोक-परलोक मेला लगा माया का- जिसमें फिरता एक मुसाफ़िर आती-जाती हरेक श्वास में- कटती है यह जीवन क read more >>
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