[email protected]
Join Us:
Home
Category
कहानियाँ
कविताएँ
ग़ज़ल
गीत
शायरी
आलेख
महत्वपूर्ण सूचनाएँ
Topic
धार्मिक
राजनितिक
प्यार-महोब्बत
हास्य-व्यंग
बाल-साहित्य
समाजिक
देश-प्रेम
दुःखद
साहित्य लाइव सूचनाएँ
अन्य
Videos
Others
Search Articles
Latest Updates
Popular Articles
Testimonials
Video Tutorials
Winner List
How to publish articles
My Account
Login
Register New Account
Forgot Password
Login
दिशा-लाइव ग्रुप ने लॉन्च किया नया ब्रांड BizPry - लोकल से ग्लोबल तक
20 मई स्पेशल -इंटरनेट पर कविता कहानी और लेख लिखकर पैसे कमाएं - आपके लिए सबसे बढ़िया मौका
साहित्य लाइव की वेबसाइट हुई और अधिक बेहतरीन और एडवांस
साहित्य लाइव पर किसी भी तकनीकी सहयोग या अन्य समस्याओं के लिए सम्पर्क करें
समाजिक
Home
Sub-Categories
समाजिक
हरि_प्रेम
प्यारे तारे हरि लगे, लगते तुम हो चांद। दिव्य सितारे आप ही,होते कभी न मांद।। सदा सहारे आप प्रभु,अभिलाषा भी आप। मंजिल भी हो आप ही, करूं आ�
read more >>
वृंदावन सुखधाम है
वृंदावन सुखधाम है, जहां अटल अभिराम। राधा रमण निवास से, कण कण है गुलफाम।। वृंदावन सुखधाम है,सुन्दर मृदुल स्वभाव। प्रेम धार में मग्न स�
read more >>
संघर्ष करो
तुम थोड़ा तो संघर्ष करो। बढ़ चले चलो आगे मग में कांटों को चुभने दो पग में डटकर बाधा स्वीकार करो दुविधा को जीतो पार करो जो मिले उसी स�
read more >>
मन कहता है
मन कहता है कुछ ऐसा लिख दूं मैं अपने मन के भाव को शब्दों में व्यक्त कर दूं मैं ऐ मन तुम चाहो तो मैं कुछ ऐसा लिख दूं जो जीवन की कड़वी स
read more >>
*तुम विदेश क्यों जाते हो*
*तुम विदेश क्यों जाते हो* छोड़कर अपनी मातृभूमि को तुम विदेश क्यों जाते हो अपने स्वार्थ की खातिर तुम क्यों परदेशी बन जाते ।। मात-पित�
read more >>
मन वीणा के तार है
मन वीणा के तार है, रखूं मध्य में साज। गीत प्रेम का मैं सुनूं,कायम रहता राज।। मन वीणा के तार सा, उड़े फिरे यह तेज। रखता हूं सम्हाल कर,खुश�
read more >>
मेरी आँख वहाँ रोती है
मेरी आँख वहाँ रोती है । विस्थापित-सा जीवन जीकर कर्कश बोलों का विष पीकर अपने ही जर्जर कंधों पर ममता लाश जहाँ ढोती है । मेरी �
read more >>
Jeevan hi kuchh aisa hai
कविता -जीवन ही कुछ ऐसा है जीवन ही कुछ ऐसा है समझो दुःख के जैसा है सोंचते हो सुख है जीवन कभी नही यह वैसा है। देख ले पापा का जीवन जीना स
read more >>
क्योंकि मैं दिसंबर हूं
कविता -क्यों कि मैं दिसम्बर हूं कपकपाती बर्फीली साल की अंतिम शर्मीली ठंड भरी अंबर हूं क्योंकि मैं दिसंबर हूं। पड़ते सर्दी का �
read more >>
हार जीत के दाव में
हार जीत के दाव में, फसा जगत के लोग। मन से अथक प्रयास कर,पाते सुख का भोग।। हार जीत के दाव पर, पूर्ण लगा कर ध्यान। जीत सुनिश्चित कर चलें,रख
read more >>
नया साल-किस बात का नया साल
किस बात का नया साल मना लूं क्या छोड़ो बुझते दीपकओ को और नया दीप जला लूं मुझे तो इस धरती अंबर जलवायु में कोई फर्क नहीं दिखता दिखता तो म�
read more >>
मानव तन के दो रूप
मानव तन के दो रूप, प्रथम देह का- अंत। दूजा है प्राण- अनंत, पल दो पल का साथ।। मानव देह गुण अनेक, स्वयं का ज्ञान मूल। अंत से अविनाशी तक, वि�
read more >>
« Previous
Next »
Showing
4105
to
4116
of
5535
results
‹
1
2
...
340
341
342
343
344
345
346
...
461
462
›
Join Us:
© 2026 |
Sahity Live
®
| All Right Reserved.
A product of
DishaLive™ Group
| Digital Partner:
MyDL.in Website Builder