हर घर की शान है
बुजुर्गो से ही हम बच्चो की पहचान है।
इनकी छवि जैसी होती है,
वैसे ही हमारा स्वरूप भी बनता है,
तभी तो लोग कहते है कि तू अपन� read more >>
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परिदे घर से निकले हैं,
ढूढने नए से निकलें हैं,
अपने झुझ के बीच में,
ढूढने अपना अभिमान,
थके हारे लगे रहते हैं,
पाने पूरा आसमां को read more >>
ये फिजायें कह‌ रहीं कुछ
इनसे भी कुछ सीख लो।
दिल को गम से दूर कर दो
प्यार करना सीख लो।
ऐसा कोई काम कर तू
हर कोई सागिर्द हो।
हर किसी के read more >>
‘‘अमा यार, तुम्हें मालूम है! आज मेरे घर साधुओं की फौज आई थी।’’ राजेश ने सहकर्मी गौतम से कहा।
गौतम ने अनमने ढंग से जवाब दिया,‘&lsquo read more >>