ये बात समझ में आई नहीं ओर किसी ने समझा नहीं कैसे करूं मन की बात ये सा कोई ही नहीं जो मान में बात थी वी मान में ही रह गई जो दिल में बात थी वो � read more >>
# जिन्दगी .....
मध्यमवर्गीय जिंदगी ,
कर्जदारों की बंदगी
बंट गई है किश्तों में ,
आगे और कुछ नहीं ......!
चिन्ता नेताम " मन "
नगर पंचायत डों� read more >>
मंदिर में मूरत किस काम की है जब किसी के घर में रोटी ना शाम की है दिल दुखी है मन उदास है फिर पूजा किस काम की कोई रो रहारा मंदिर के बहार फिर � read more >>
तब लैंडलाइन फोन का जमाना था। एक दिन मेरा पड़ोसी मेरे घर आया और दर्दभरे लहजे में बोला, "मेरा फोन काफी दिनों से डेड पड़ा है। सूं-सां...सां...सां read more >>