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*पुण्य का परिणाम है बेटी*
*पुण्य का परिणाम है* *बेटी* पिता की आत्मा मां का अभिमान होती है बेटी पूर्व जन्मों में किए पुण्य का परिणाम होती है बेटी।। मेरे जीवन
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पैसा
मेरा कोई महत्व नहीं मैं तो केवल आवश्यक वस्तुओं के आदान प्रदान हेतु एक चिन्हित मुद्रा हूं परन्तु संसार के कुछ स्वार्थी व्यक्तियों �
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ईमान है महंगा
दो वक्त की रोटी से कुछ बढ़के नहीं देखा मुफलिसी ने चांद को जी भरके नहीं देखा ईमान है महंगा मेरा शायद कहीं बिक जाए लेकिन ये सौदा आज तक कर�
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संवेदनाएं
मर चुकी हैं संवेदनाएं जीवन की पथरीली कंटीली राहों पे चल के या मार दिया है स्वयं अपनी संवेदनाओं को भौतिक जरूरतों के लिए उस गंतव्य के �
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जय हो गुरुदेव!
कविता- जय हो गुरुदेव! जय हो! महाज्ञानी गुरुदेव ज्ञानदाता। सच्चा पथ प्रदर्शक भगवान विधाता।। सूर्य के समान चमक रहा है विद्याधर। साक्�
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जीत की अंधाधुंध तैयारी
कविता- जीत की अंधाधुंध तैयारी आखिर एक दिन जीत जाऊंगा मेरे मन में है विश्वास। किए जा रहा हूं तुम्हें पाने के लिए मैं अंधाधुंध प्रयास।�
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दिखावटी चेहरा
दुनिया के लोग जैसे दिखते हैं वैसे होते नहीं, चेहरे पर नकाब लगाए रहते हैं, पीछे से वार करना चूकते नहीं।
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जिंदगी का बदलाव
हाँ बात सच है परेशान हूं मै, बदलते देख जिंदगी के रंग हैरान हूं मै। क्या यही बदलाव है जो आदमी के जीने का तरीका ही बदल दे, भला इन्हे क्या ह�
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जागृति करो स्वयं चेतना
जरा इक बात बाताओ तुम हार गये क्या सांस तो चल रही है पर अपने को जिंदा मार गये क्या। हाँ माना तुमने चोंट बहुत खा ली है जी
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तंबाकू
मत पियो मोटियारा थे दारू। थारी बोली नी थारे सारू।। मत जाओ थे दारू र नैङा। ईनै नी पिवै गधैङा।। मत घाल तुं मुंडे माही जर्दो। थुख - थूख �
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tambaakoo
मत पियो मोटियारा थे दारू। थारी बोली नी थारे सारू।। मत जाओ थे दारू र नैङा। ईनै नी पिवै गधैङा।। मत घाल तुं मुंडे माही जर्दो। थुख - थूख �
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चकाचौंध
चकाचौंध से भरी इस दुनियां में अब डर लगता है गरीब होने में। धन्यवाद
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