समय -समय की बात है, समय बड़ा बलवान्।
सदा एक- सा ना रहे, चाहे देव, मनुज, भगवान्।
जिसके सिर पर ताज है, कल होगा टांकों का जाल।
फूल सेज पर जो स� read more >>
वो स्त्री है उसे पढ़ने दो, उसे बढ़ने दो.......
न मारो तुम कोख में उसे
वो स्त्री है. . . . . . . . . . . . .
शिक्षा का पाठ पढ़ने से रोको ना उसे को� read more >>
उड़ चले पर्वत वह भी,
जिनके पास ज़मीन थी l
हर कश्क खत्म,
अश्क में नयन नमl
जीना दुर्लभ है नहीं l
बिन पीर के युद्ध क्या l
मल्ल युद्ध है जिंदगी read more >>
धरती होगी ऊसर, आहा, आह‌‌ में बदल गया।
लंबी दूरी नाप रहा, स्वार्थ- सीढ़ी से सफ़र।
बढ़गी पैदावार होगी, गुण हेतु धरती बंजर।
रिश्ते नात� read more >>
हितैषी तब तक हितैषी रह पाता है,
जब तक उसके निजी स्वार्थ में कोई आँच नहीं आता है।
जब उसके उसके निजी स्वार्थ पर कोई आँच आ जाता है,
तो वो हि� read more >>