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बचपन आज यह सोच रहा कहाँ खो गया आज वो खुद अपने को खोज रहा बस्तो के नीचे दबा हुआ सोने के समय जगा हुआ भाग दौड़ के इस समय में वो समय के पीछे खो read more >>
यह है विषमता का जाम। पी -पी पागल हो रहे, दुनिया के लोग तमाम। जो गंवार हैं, वे शुद्ध गंवारू रूप में पीते हैं। पढ़े-लिखे थोड़ा, पानी मिला ल read more >>
कविता (आज बचा कुछ भी नही) थोङे ख्वाब ,थोङी हकीकत, थोङे सवाल, थोङे जवाब, समझने-समझाने मे गुजर गई उम्र सारी, आज बचा कुछ भी नही ।। कुछ अपने read more >>
(कविता) बेरोजगार की आवाज .... गांव गली शहरो मे चर्चे आम हो जाए, सत्ता धारी द्वार खोले तो हम तेरे हो जाए, तुम्ही हो भाषण, तुम्ही हो ताली, त� read more >>
कविता:-  क़िताबों का दुर्भाग्य.. रुसवा होकर करी बड़ाई ,फिर विरह अग्नि में देह जलायी मीत गया प्रदेश, सहेलिया धुँआ सू आँख गवायी , धूल मिट्� read more >>
कहाँ हो तुम, कहाँ हो तुम मैने ढूंढा तुम्हें हर कहीं पर कहीं ना मिले तुम कहाँ हो तुम, कहाँ हो तुम किसी ने कहा मंदिरो में हो तो किसी ने मस� read more >>
रामायण के रावण ने तो सिर्फ सीता माता को उठाकर ले जाने की गलती की थी ! कभी उसने अपना संयम नही खोया ! फिर भी लोग उसे हरसाल दशेरे के दिन जला read more >>
तुम वीर हो... न मानो तो तुम कायर, तीर हो, तुम मानो तो विश्व की तस्वीर हो, तुम वीर हो  राजवीर हो... सब कुछ बिखरा है इधर उधर,कई किरदार छूटे ह� read more >>
-: नशे मे गांव 😔 कहर ढाया, मातम छाया, देखो गांव को ये क्या हो रहा, जमकर खून रगों मे जी सूख गया... आजकल के जवानों के मिल जाती बेकार जवानी, नाल� read more >>
मानव बदल गया कितना अब बताता हूं मै, परिवर्तित मानव की ये तस्वीर दिखता हूं मै था नहीं ज्ञान उर में परन्तु था विवेक कम से कम झूठ सत्य क्� read more >>
पतित को क्षमा कैसी | पतन में अग्रसर जो हो, क्षमा के योग्य हो न हो क्षमा करने में पर एक बार, न कोई हर्ज़ है ऐसी पतित को क्षमा कैसी| मगर जो ह� read more >>
थक हार कर पेड़ के नीचे, बैठ गई एक चींटी सोचने लगी, काश मैं भी होती इंसान मशीनें करती मेंरा सारा काम सोचते ही वह चींटी हो गई इंसान अपनों � read more >>
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