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पुष्पों का है नाज़ बढ़ा, छुकर मात्ता के चरणों को! आवाज़ धरा पर अमर रहा, ले मात् नाम उद्धरणों को!! है अचल चाह कि चल जो कामना, read more >>
अनबोलता के दुःखों का अनुवाद नहीं हुआ कचहरियों में कोई संवाद नहीं हुआ मानव ने जानवर पर अनगिनत जुल्म ढाए मृत्यु पर उनकी विवाद नहीं हु� read more >>
तेल, नमक, लकड़ी, चीज याद रह गई तीन। जीता -जागता मनुष्य, बनके रह गया मशीन। खाना- पीना, उठना- बैठना, सबकी रेल- पेल। भौतिकता की चकाचौंध ने, बि� read more >>
*रक्षाबंधन* भैया रेशम के धागे का बंधन भूल न जाना रक्षाबंधन के दिन भैया बहिन को नहीं भुलाना। घर में रहकर बचपन मे हम कितनी धूम मचाते थ� read more >>
कविता- रक्षासूत्र सुन मेरी प्यारी सहोदरा, राखी बांधने आना तुम। देखता रहूंगा राह तुम्हारी, मुझे भूल ना जाना तुम।। खरीदना बाजार से र� read more >>
# दोस्त ..... कभी नरम , कभी सख्त जो जनाब होता है ..... सच में वही दोस्त इस दुनिया में सबसे लाजवाब होता है ..... चिन्ता नेताम " मन " डोंगरगां� read more >>
# किताब .... मैं क्या हूं , कैसा हूं किसके जैसा हूं , जानना चाहोगे जनाब ....? तब तो , पढ़ कर ही मुझे जान पाओगे आप ....! मैं तो हूं एक , खुली ह� read more >>
# निनाद ….. हे मानव तुमसे मेरी है ये विनम्र विनती है यही मेरी दिल की निनाद …..! मानव मस्तिष्क के एक कोने में सड़ा सा पड़ा ये जमा हुआ read more >>
आओ, झूमों, नाचो, गाओ देखो रुत है सावन की आई घुँघराली, काली घनघोर बदली जब आसमान में है छाई धरती ने भी झूम, झूम कर विरह प्यास बुझाई सावन की � read more >>
जिल्लतों से राब्ता करके इज्जतों का सफर करना क्या इसे ही कहते हैं मेरे दोस्त जिंदगी बसर करना ये क्या कम है बस्तियाँ फूंक दीं घर बार जल� read more >>
कविता- ज्ञानमणि कोई बन सपेरा नचा रहा है मुझे ? अपनी बीन के सुमधुर धुन पर। लहराकर, झूमकर नाच रहा हूं, जादुई आवाज को सुन-सुन कर।। मेरी चा read more >>
कविता -नायक नायक का किरदार जीवन के रंग मंच पर शुरू होता है शुरू से अंत तक, सुख दुःख के संगम में नहाकर, धोता है मन के मैल को हंसाकर, कृष read more >>
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