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कविता -आंगन बांटों ना आंगन बन्धु! आज तोड़ो ना रिस्तें मधुर आज। तुलसी सी मां-ममता महके घर का कोना कोना गमके जीवन की ज्योति read more >>
जहां आप, अपने रहकर भी हो लुप्त। आप ही सुस्थ, बाक़ी सब सुस्त। जिस शिखर पर आप, अपने बहुत पीछे छूट जाएं। चाहकर भी आपका, नजरों से नाता टूट जा� read more >>
चल मुसाफिर एक राह पे चल जिंदगी के एक गुमराह पे चल हर लोग है बुरे भले तुम्हें चलना है अकेले जिस राह पे अनेक कांटा है उसी राह पे जिंदग� read more >>
कविता -मुलाकात चलता गया चलता रहा मिलता रहा हर लोग से, जीवन सफ़र कटता रहा मुड़ता गया हर मोड़ पे, जितने मिले जैसे मिले अपने मिलें या read more >>
इत्र से खुशबू को महकाना। कौइ बडी बात नही है। मजा तो तब आता हैं। जब खुशबू आपके किरदार से आये। read more >>
जिंदगी में अपनापन। हर कोई दिखाता है। पर अपना कौन है। ये तो सिर्फ वक्त बताता हैं। read more >>
' अब छोड़ो भी यार ' ऐसे कहते हुए निगार अपने पति नरेश को मनाती है, मगर अफसोस उसका पति मानने की जगह उसके हाथ को छिटक कर आगे चला जाता।वह फिर भी read more >>
अच्छाई के पैर किनारा नहीं पाते,।मगर, सदैव अमृत तक पहुँच जाते हैं,,।। वक़्त के आगे भला किसका पहरा है,। जो जिय, गया, मुस्कान के साथ,।मगर, उस read more >>
काले बादल आसमान में अपनी जगह बना ली थी, बारिश के बौछार होने लगी थी।उसी समय एक लड़का जिसका नाम आयन और उसकी उम्र १३ साल की थी वह स्कूल से अप read more >>
कविता -ढलता हुआ सुनहरा शाम रंग बिरंगे बादलों संग लाल सुनहरे पीले रंग याद दिलाता मन में आता भूलने से भी भूल न पाता बातें तमाम, ढलता ह read more >>
कविता -ख्वाइश सुख जैसे कुछ पाने की दुःख जैसे कुछ खोने की कुछ खाने कुछ पीने की जग में जीवन जीने की "ख्वाइश"है। नभ में खग सा उड़ने read more >>
धितकार भरी नजर, फिजूल थे सबकी नजरो मे न थी अहेमियत, बेकार केह रहे थे हर किसी ने सफलता की शिखर चढ़े तो ,लगा की सुकून मिली तब हम भी गिने जान� read more >>
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