* नई जनरेशन *
रंग ढंग नई जनरेशन के
हमको समझ न आए ।
सदी बीस को छोड़ के
ये इक्कीसवीं सदी में आए ।।
देर रात तक जगने की
आदत इनके मन भाए ।
नौ � read more >>
मैं गांवपहुंचता हूं तो देखता हूं कि गांव में सब कुछ पहले जैसा ही है मेरा बचपन मेरे गांव में ही बीता मेरे माता पिता किसान थे हम दो भाई थे � read more >>
कभी वक्त था तो वक्त ना था ,डरते थे कहने से ।
मुस्किल में होते वो , तब डरते थे उनकी मुस्किल सहने से ।।
वो रोज अदब से सुबह सर नवाते थे , क्या read more >>