मैं नहीं काठ की कोई पुतली
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मैं नहीं काठ की कोई पुतली,
ना सौप किसी गैर के हाथ मुझे ।
मोहे सात फेरो में बांधने से पहले बाब read more >>
कुछ रास्ते, रिश्तों को कुचल गए।
कुछ मैं, कुछ मेरे दोस्त बदल गए।
गलियों वाले, सड़कों पर चक्कर काट रहे।
सूरे- पूरे बन गए, जो कभी पौने आठ रह� read more >>
मिट्टी से बनकर ही जन्मा,
मिट्टी का इंसान है |
किस बात की ईर्ष्या. है|
और किस बात की माया है|
किस बात का लोभ है पगले,
किस बात की काया है |
जो � read more >>