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श्रद्धा कि अंजली है स़मा संघर्ष कि संघर्ष कि है दास्तां, मुश्किलें कंकड़ बनी और जड़ बना है ये जहां! कह रही राही से राहें डर नही त read more >>
संसार में दो तरह के परिंदे हैं, एक घायल होकर मर गया, एक जिंदा रहकर कुछ कर गया। read more >>
साल दर साल, साल बदल जाते है न जाने कितनों के मुकाम बदल जाते है और बदलते नही,जिन परिंदों के हौसले ए मुकाम आसमां खुद उनकी उड़ानों के लिए ख� read more >>
यह किस्सा है समाज का जहां हर जाति धर्म के लोग रहते हैं जो करते हैं बात कानून की जो नियमों को दोष दिया करते हैं अक्सर होते हैं वही समाज क� read more >>
अच्छे संस्कार तन को पूर्ण रूप से ढकने तक ही नहीं बल्कि बुरे विचारों को अच्छाई से ढकने से भी है. लेखक पंकज कुमार बुड़ाकोटी read more >>
काश मैं होता एक परिंदा उड़ता रहता, आसमान में बिना किसी रूकावट के दूर रहता दुनिया के झंझालो से, रखता नहीं कोई गलत विचार, ना करता दो रंग read more >>
मोती सा मस्तक पर झिलमिल लुढ़क रहा धीरे धीरे झर झर झरता पग तल रज में , जाता चूम चरण तेरे, इस मोती में भाग्य झलकता तेरा जी हो लेकर चल, read more >>
नन्हें नन्हें पग लेकर आई हैं जग में बेटी , कहलाती हैं लक्ष्मी का रूप घर की शोभा हैं बढ़ाती, किलकारी से उसकी कलिया भी खिलखिलाती, नन्हीं � read more >>
हल्की फुल्की पतली सी एक दरार से ताकता रहता हूँ दुनियाँ को इस पार से दरिया बहाकर ले जाता है अपने साथ कट कर गिरती है जो मिट्टी किनार से read more >>
कागज और कलम एक दूसरे के जीवनसाथी हैं, जैसे कागज बिना कलम के अधूरा है, वैसे ही कलम बिन कागज के चलती ही नहीं. लेखक पंकज कुमार बुड़ाकोटी read more >>
रंगों की अपनी है एक अलग पहचान, करता नहीं कोई इन का अपमान, हर बात किस्सों में आती है इनकी याद, कभी-कभी तो यह बन जाते हैं हर किसी के भी विवा� read more >>
किसी से भी उम्मीद तब तक होती है जब तक हमें हर चीज पाने की लालसा रहती है, जिस दिन लालसा खत्म उस दिन से उम्मीदें भी खत्म. लेखक पंकज कुमार ब� read more >>
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