मैं आदमी असरदार हूं
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मुझको नहीं फिकर कोई
न जीत की न हार की
बस एक ही डगर चला
सेवा समर्पण प्यार की
छल छिद्र कपट से परे
मुश्किलों � read more >>
सासू मां जमाना बदल गई पर आप ना बदली लोग कहां से कहां पहुंच गए लेकिन आपकी सोच बस घर के चार दीवारें में बंद और मुंह से आह तक ना निकले ऐसी बह� read more >>
वो पुराने दिन, वो सुहाने दिन
जब टीवी घर आया, तो लोग किताबें पढ़ना भूल गए ।
जब कार दरवाजे पर आई, तो चलना भूल गए ।
हाथ में मोबाइल आते ही चिट् read more >>