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यह कहानी है वह हर बच्चे की जो बड़ा हो जाता है अपने काम और अपने परिवार में व्यस्त हो जाने के कारण माँ बाप को भूल जाता है ।बच्चा चाहे कितना read more >>
गाँव की बात निराली गाँव में सुबह - सुबह चार - पांच बजे ही चिडियों की चहचाहट, गाय - भैंसों के रमभाने की आवाज शुरू हो जाती है। घर के बड़े बुज read more >>
सुनो मेरे मित्र, तुम भी तो मेरी सुनो, हैं ठोकरे खाईं है इस दुनिया में मैनें, मिला है मुझे घोर अपमान सभी से, आशा की उज्ज्वल रेखा के साथ ज� read more >>
प्यारी बेटी (बेटी है तो कल है) किसी गाँव में एक परिवार रहता था। उस परिवार में गणेश अपनी पत्नी रेखा, छोटा बेटा दिनेश, बहू विमला, पौत्री अ read more >>
प्यारी मां ! प्यारी मां ! है सब से तू न्यारी मां ! मेरी प्यारी मां । सब कुछ लुटाकर तूने, जन्म दिया है मुझको, सर्वस खोकर तूने, गले लगाया है� read more >>
मैं खुश हूं, हा मैं बहुत खुश हूं,😊 नही हूं मैं परेशा कि किसी ने मेरी बगिया में खिलते गुलाब को तोड़कर जमीन पर बिखेरा है, मैं खुश हूं क्यो� read more >>
हमारे बुजर्ग हम से वैज्ञानिक रूप से बहुत आगे थे। थक हार कर वापस उनकी ही राह पर आना पड़ रहा है। 1. मिट्टी के बर्तनों से स्टील और प्लास्टिक read more >>
जीना चाहता था मैं एक ऐसी दुनिया में, जहां लोग छल-कपट से परे हो, समझे सभी को अपने, बनकर जिए और समझे अपने । सोचता-सोचता बस बनकर रह गया मुसा� read more >>
शस्त्र तुम भी उठा लो अपने कर मैं । दिखाओ प्रतिभा कौशल अपने रण मैं मिलेंगे अन्जान पथ पर कपटी मगर उनसे होना न भयभीत क्षण मैं read more >>
सीमा (आपकी ख्वाहिशों को मैंने सम्भाल रखा है) बेटा अब खुद काम करके पैसे कमाने वाला हो गया था, इसलिए बात - बात पर अपनी माँ से झगड़ पड़ता था। य read more >>
रंग बिखेरते फूल एक कस्बे में एक सामान्य परिवार निवास करता था। परिवार में पति हरि प्रसाद और पत्नी नारायणी और दो बेटे थे - बड़ा बेटा सुरे� read more >>
मंज़िलें क्या हैं रास्ता क्या है हौसला हो तो फ़ासला क्या है read more >>
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