यादें - बचपन की
यादों के उन उधड़े चिथड़ों को
आज भी फिर से जीना चाहता हूं
आज फिर से उस बचपन को जीना चाहता हूं......
कितना आनंदित था मैं
न सोने read more >>
कुछ सवाल - कुछ जवाब
न कोई कलम, न कोई किताब, रखता हूं
पल भर की जिंदगी है यह सोच
न कुछ लेने का, न कुछ देने का, हिसाब रखता हूं........
न अलीशान महलो� read more >>
ढोल नगाड़े बज उठते है ,जब कुल दीपक घर आता है ,
वंश परंपरा की अगली पीढ़ी में,एक नया नंबर जुड़ जाता है |
बेटा ,माँ का दुलारा ,नैनों का तारा ,
भाई ,ब read more >>