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दुःखद
जिंदगी मेरी हुई बरबाद
कहीं का ना छोड़ा तुने, कहीं का ना छोड़ा दिल मेरा तोड़ा तूने,दिल मेरा तोड़ा झूठी थी तेरी हर बात, झूठा था तेरा प्यार तू एक मतलबी इंसान, तू
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जीवन में ऐसा क्यों होता है
जाके फिर लौटना साथी, देखेंगे हम तुम्हारा रास्ता। कब मिलोगे ये तो कहो, दे दो कम से कम अपना पता।। जीवन में ऐसा क्यों होता है, मिल के क्�
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मिट्टी मे मिल जाएगा
तुने रुलाया है तु भी रोयेगा तुने तड़पाया है तु भी तड़पेगा तुने किया जो ओ आगे आएगा तु न उसकी सजा से बच पायेगा आह लगेगी पाप लगेगा,खाक हो �
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बिना जुल्म के ही
बिना जुल्म के ही जुल्म सहे जा रहा हूँ उसकी ना इंसाफ़ी का जहर यु ही पीए जा रहा हूँ अब तो हद हो गई हद की मालूम नहीं क्यों यु ही जिए जा रहा
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काश तु भगवान ना दि होती ये जिंदगी
काश तु भगवान ना दि होती ये जिंदगी दि थी तो लिख देता नसीब मे थोडी खुशी अब तो भुल चुके हैं कैसी होती है हसी गम ही बन गयी है अब ये जिंदगी ल�
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जिया निकाल के अपना फायदा
छोड़ के आये सबकुछ जिसके भरोसे वही तोड दे भरोसा तो जिये कैसे क्या सजाये थे सपने संग उसके तोड दिये सारे पल में उस ने ना समझ सका ओ रिश्ता
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काश मेरी भी किसीको जरुरत होती
काश मेरी भी किसीको जरुरत होती काश मेरी भी किसीको किमत होती काश मेरी भी किसीको चाहत होती काश मेरी भी किसीको इफाजत होती काश मेरे लिए भ�
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तितलियां बेपर्दा जब से
गुलशन में अब रंग बू बहार नहीं है। चटकी हुई कली का यार नहीं है। तितलियां बेपर्दा जब से आ गयीं। अब हवस है बाकीं प्यार नहीं है। बिजली �
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दो वक्त की रोटी
बेरोजगारी के दौर में,क्या खाया जाय क्या पिया जाए। यू ही नही कटती दिन रात, परिवार का खर्चा कैसे चलाया जाए।। मेरे जिंदगी में जिम्मेदारी
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हसरतें दिल की दवी रह गई
हसरतें दिल की दवी रह गई जुवान से न निकला लफ्ज़ कोई सपने तो थे सुनहरे कई जो सपने में ही, कहीं खो गई।
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एक गांव में दो मित्र रहते है सन्नाटा - भन्नाटा
सन्नाटा - भन्नाटा एक गांव में दो मित्र रहते है।एक का नाम है सन्नाटा और दूसरे का नाम है भन्नाटा। सन्नाटा और भन्नाटा,दोनों के माता-पिता
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तू जान थी कभी
तू जान थी कभी अरमान थी कभी मेरी बुझती सासों की तू चीराग थी कभी तुझे चाहा था इश्क़ से ज्यादा पर मैं समझ न पाया तेरा इरादा इस लिए तू इश�
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