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दुःखद
लौट कर जा रही हूं अब जो तेरी दुनियां से
लौट कर जा रही हूं अब जो तेरी दुनियां से खुदा से दुआ करेगें तू खुश रहे अपनी दुनियां में तुझपे न आए कभी कोई आंच बस इतनी ही चाह रहेगी मेरी �
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कोशिश जीने की
जीने की कोशिश न कर, तुझे जीना नहीं आता है। कभी हाथों से जाम न पकड़ना, तुझे पीना नहीं आता है। ये शराबे- इश्क है, जान ले लेती है। लत ऐसी �
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दिवानगी की एक हद थी,
दिवानगी की एक हद थी, उन्हें अपना बनाने की एक मकसद थी। अपने साथ कैद परछाई से, एक बार आजाद होकर के देखो। किसी बेगाने के पीछे, एक बार बरब
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मैं प्रकृति सुंदरी हूं
कविता- मैं प्रकृति सुंदरी हूं मनोरम मनोहर, छंटा वादियों की सजी दुल्हन जैसी,प्रकृति सुंदरी हूं। सजी हूं धज
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शबनम किसी के आँसू हैं!
रात बीतती चली गयी, सुबह होकर भी शाम में बदल गयी। यह कैसा है मुहब्बत का फसाना, जो थी अपनी कहानी, गैर के नाम में बदल गई।। चाँद था प्यारा �
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चुप बैठा है देखो
वो चोट देकर कहीं बैठा है देखो हम उफ़ भी ना किए तो वो समझे हम खुश है देखो। धन्यवाद
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मेरा अच्छा होना दूसरों के लिया तो अच्छा था
मेरा अच्छा होना दूसरों के लिया तो अच्छा था। पर मेरे ख़ुद के लिये अच्छा होना बड़ा महँगा पड़ा। सचिन कुमार सोनकर
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होली की सितम
फिर आई दर्द लेके होली, सारे गुलाल उड़ रहे। उनकी एक याद है कि, जो मलाल की जड़ रहे।। बेचैनियाँ रंगों की मानिंद, जीवन में एक फुहार की तर�
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हर मंजर बदल गये।
हर तरफ है धुँआ, अचानक एक पल में क्या हुआ? सामने आँखों के , हर मंजर बदल गए। आँखों में एक पहरा, जख्म देख जरा गहरा। दिवानों के कत्ल में स�
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जिंदगी की कहानी
कहानी दो पल का गम, कई सदी कह गया। मेरी आँखों में सिर्फ, एक बियावान मंजर रह गया। तड़प हर रोम- रोम की, मैं अब भी सुन रहा हूँ। बीते हुए प
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राह में थी एक रंजिश रंजिश
रंजिश राह में थी एक रंजिश, ठोंकर लगा के पछता रहे हैं। पाँवों के दर्द अब भी, बनकर नासूर की तरह सता रहे हैं।। उस राह पे न चल, जिसकी कोई �
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पीड़ा से क्रिडा़
जिस तरह से बच्चे की क्रिडा़ प्रफुल्लित करती हैं| उस तरह ही जीवन में पीड़ा कष्ट पैदा करती है| तू पीड़ा से क्रिडा़ कर, ओर जीवन में आनंद भ�
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