मैं हारा, थका, बड़ा हुआ, लड़खड़ाते कदमों के बल खड़ा हुआ,
कई बार आईं अटकलें, खुद से मैं रूठा,
दुनिया हंसेगी मुझपर इस बात से मन टूटा।
ये गिरने के read more >>
"अब हमारी बारी है"।
पढ़ा लिखाकर बड़ा कर दिया,
अब माँ-बाप की खत्म हुई ज़िम्मेदारी है।
हमारे कंधों पर अब उनकी ज़िम्मेदारी है।
कुछ बन कर द� read more >>
सांस की उलझी डोर है, मन भी हारा हुआ है;
होगा यही परिणाम अगर तो फिर अपना शान क्या हो?
हे ईश्वर! दे वो शक्ति-की ये जग वरदान सा हो।
अपने-अपनो � read more >>
ये आँख-आँख नही है, गहरा दरिया है,
नज़र बदले नही हैं, बस बदला नज़रिया है।
दुनिया के हर रहम में कुछ ख़ास छिपा है।
कहने को सब सही हैं, नही तो सभी � read more >>