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ग़ज़ल
हैरान था मैं आपको हैरान देखकर
हैरान था मैं आपको हैरान देखकर ऐसे तुम्हारे हुस्न का ऐलान देखकर। जब इश्क तोलने को तुम्हारा कहा गया मैंने नजर ही मोड़ ली मीजान देखकर।
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बिन बाती के दीपक जलाया नही जाता
भूल से वो हमसे भुलाया नही जाता दिल में लिखा फिर मिटाया नहीं जाता ।। तुम आओ तो रोशन हो सकता हु में बिन बाती के दीपक जलाया नही जाता ।। द�
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जो लोग मिरे नाम से महबूब रहे हैं
जो लोग मिरे नाम से महबूब रहे हैं वो हल्का ए आगोश में तो खूब रहे हैं। कुछ ना मिला तो उसने मिरा नाम लिखा है खाली न कभी हाथ के मकतूब रहे हैं
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कुछ इस तरह से अबकी सताया गया मुझे
कुछ इस तरह से अबकी सताया गया मुझे हँसने लगा तो फिर से रुलाया गया मुझे। हर शख्स जिंदा देखके हैरान था यहां कल फिर से खलबतों में बुलाया ग�
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इन मयकदों काअबकी सारा हिसाब कर दे
इन मयकदों काअबकी सारा हिसाब कर दे मेरे लहू की बूंदों को ही शराब कर दे। जालिम न चल कमर को अपनी दिखादिखा के ऐसा न हो ये मेरी नीयत खराब कर �
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कोई तो याद मेरी कहानी रखे
कोई तो याद मेरी कहानी रखे बेवजह अपनी आंखों मे पानी रखे। रब्त है जब उसे हर नई चीज से सांस क्यों फिर बदन में पुरानी रखे। क्यों न हो हादस
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आज फिर किसी से कोई बवाल कर बैठे
आज फिर किसी से कोई बवाल कर बैठे सर ए राह मोहब्बत का सवाल कर बैठे। कांच का बदन उसका कांच की कमर उसकी और कांच की तशरीफ है सँभाल कर बैठे। �
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जिन हसीनो के यां नखरे उठाए जाते हैं
जिन हसीनो के यां नखरे उठाए जाते हैं उनकी आंख से खंजर भी चलाए जाते हैं। वागवान ए गुल के मुंह से सुना हमने हर निगाह में उनकी फूल पाए जात�
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कोई फकीर फुकरा बताया गया मुझे
कोई फकीर फुकरा बताया गया मुझे मेरे ही घर मे पूछ के लाया गया मुझे। पहले कहा सभी ने जरा हंस दीजिए जो हंसने लगा तो रुलाया गया मुझे। हां इ
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बिछड़ने वालों से फिर गीला क्या
कहो तो करले अब सुलाह क्या खत्म कर दे ये सिलसिला क्या ।। बिछड़ने वाले है आओ गले मिले बिछड़ने वाले से फिर गीला क्या ।। सच ही तो है इश्क �
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ख़ुदा खामोश बैठा है
ख़ुदा खामोश बैठा है अकेला बन्द कमरे में बड़ा गुमसुम सा रहता है अकेला बन्द कमरे में आके दुनिया में शायद बहुत करीब से देखे इन्सां बनाए
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हम सच वफ़ा ईमान से
हम सच वफ़ा ईमान से आगे न बढ़ सके गुरबत के इस मकान से आगे न बढ़ सके सरमायादार बन गए वो ईमान बेचकर हम छोटी सी इस दुकान से आगे न बढ़ सके दु�
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