सांझ ढले ,तो घर आना तुम,
कई उम्मीदों को, फ़िर लाना तुम।
छुट रहे ,उन रिस्तो की डोर को,
फ़िर मजबूती से, बंध जाना तुम।
साँझ ढले तो ,घर आना त� read more >>
ये बारिश का मौसम भी क्या रंग लाया
कहीं खुशियों का मंजर तो कहीं गम का साया,
कहीं कोयल की कू कू कहीं सावन की मस्ती, कहीं पानी में डूबी गरीब� read more >>
मुद्दत बाद सफ़र मिला हैं..जिंदगी तू अब ठहर मत
चलते रहे बस उसी रास्ते..गिन तू अब शहर मत...!
जो गुजर रहा हैं उसे बस..अब गुजरने दे
तू हंसी ख़ read more >>
कविता = ( कोख )
कोख में अपनी माँ मेरी हमको देती मार !
नारी नर्क से निकाल के हमको कर देती उद्धार !!
श्राप ग्रस्त इस योनि से हमको देती तार !
हम read more >>