महारथी हो रथारूड़, चक्रव्यूह में चक्कर काट रहा।
एक से बढ़कर एक कायर, कपटी, कोई न किसी से घाट रहा।
हिन -हिन करते अश्व, पहिए घरर -घरर करते थ� read more >>
हर पल तेरी याद आती है ,
आंखों में वो नमी लाती है
कुछ तो समझ तुझे भी आता होगा ,
क्योंकि ये बेकरारी तुझे भी सताती है
यू ही नही नारियल , गुल� read more >>