(मुक्तक छंद)
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जिन्दगी को मैंने इस कदर देखा जिन्दगी मुझ में डूब गई।
मेरी हर चाहत को पूरा करने के लिए मजबूर हो गई।
अब आलम यह है कि सारी दु� read more >>
प्रेम की भाषा सुन, सजनी रे,
बिंदिया चमक रही है आँखों में।
उठो, बसो नींद से हरियाली के पल,
संग गीतों के लहराते हैं तन में।।
सावन के बादल, � read more >>
तुम्हें चाह कर हम कहां खो गए
बता दो हमें हम कहां खो गए।
ना जागते , न सोते हैं हम
नींदों में भी अब तो रोते हैं हम।
डराती है रातें अंधेरी सी read more >>
मौसम का आज मिजाज बदला है,
जीने का अंदाज बदला है।
फूल से खिले है चारों ओर ऐसे,
दिवाली के दीप हो जैसे।
मौसम का आज मिजाज बदला है,
जीने का अं� read more >>
राह से भटका मुसाफिर सा हो गया हूं , मैं कहीं खो गया हूं
अपनो में ही गुम हो गया हूं, मैं कहीं खो गया हूं
गाड़ी का पांचवा पहिया हो गया हूं , � read more >>