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कविताएँ
मित्रता-ये दोस्त ही है जो विन मतलब साथ निभाते है
ये दोस्त ही है जो विन मतलब साथ निभाते है। कभी देकर जख्म खूब मुश्कुराते है। तो कभी खुद उन पर मरहम लगाते है। कभी ये पास में बैठे बिन मतलब �
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यथासम्भव प्रयास-निराश हुई आहत् हुई भावनाएं यथासम्भव प्रयास जब निरन्तर निष्फल हुऐ
निराश हुई, आहत् हुई भावनाएं यथासम्भव प्रयास ,जब निरन्तर निष्फल हुऐ ।, कमजोर हो रहा था। मनोबल । संघर्ष के मैदान थमे दाँव,पर धी जिन्द
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सोच बदलो उम्मीद बदलो तरक्की की तरकीब बदलो-मानवता ना बदलो तुम रखो ख्याल
🌹🌹🌹🌹मानवता कहीं छुट रही है डोर रिश्तों की अब टूट रहीं हैं हर किसी को 💯💯अपनी अपनी पड़ी है समझ नहीं आता कैसी घड़ी है🙏🙏🙏 🥀🥀🥀छोड़ द�
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प्यार के दो परवाने जुदा-लगाई दहेज की बीमारी बन गई उनके जीवन की चिंगारी
एक लड़के को एक लड़की से प्यार हो गया, ना था लड़की के दिल में प्यार, लड़के ने बेसुमार जगा दिया, लिख डाला नाम अपने दिल पर, लड़की को दिवाना ब
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पुस्तक पर कविता-गिरने मत दो झुकने मत दो गिरे अगर तो उसे उठा लो
पुस्तक गिरने मत दो झुकने मत दो गिरे अगर तो उसे उठा लो, मुड़ने मत दो फटने मत दो मुड़े अगर तो उसे सधा लो, भीग भी
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आहत को राहत मिली-हुई सुहानी रात सजनी रहती साथ में
(दोहा छंद) आहत को राहत मिली,हुई सुहानी रात। सजनी रहती साथ में,करती दिल की बात।। आहत को राहत मिली,मिला भव्य अब प्यार। जीवन में है चाँदन�
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औरत का दुख-जो ईश्वर के दिए इस पुरुष मैं है मैं वो नारी शक्ति हूं
क्यो हर दम हर पल सबको लगे, कि औरत को साथ किसी का चाहिए, उन्नति के मार्ग में हाथ किसी का चाहिए। क्या मुझमें वो हुनुर नही, जो ईश्वर के दिए
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मेरी याद-तुझे मेरी याद आती होगी
बीत गया वो पल बीत गया वो दिन । क्या अब रह लेते हो तुम मेरे बिन । बिस्तर पर करवट बदलक�
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धीरे धीरे लक्ष्य पर-भटके कभी न वीर जो मिलती उसे पनाह
(दोहा छंद) धीरे धीरे लक्ष्य पर,पैनी रखें निगाह। भटके कभी न वीर जो,मिलती उसे पनाह।। धीरे धीरे लक्ष्य पर,चलते चलिए आप। एक दिवस पक्का मिल
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अधूरी है जिंदगी तुम बिन सनम मेरे-कहां हो तुम अब
अधूरी है जिंदगी तुम बिन सनम मेरे कहां हो तुम अब बता भी दो सनम मेरे गुज़ारिश है रब से मेरी उम्र भी लग जाए तुम्हें सनम मेरे ऐसी भी क्या न�
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पिता-पिता का कुटुंब ही उसका सारा संसार है
एक वृक्ष की तरह होते हैं पिता। विघ्न_बाधा को झेलकर, कुटुंब को पालते हैं पिता। सारी समस्याओं को सुलझाकर, चेहरे पर हंसी लाते हैं पिता।
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सर्वोदय हो-सर्वोदय हो मेरी यह कामना पूर्ण हो
सर्वोदय हो_सर्वोदय हो, मेरी यह कामना पूर्ण हो। कर जोड़ कर मैं फरियाद कर रहा हूं, अंध विश्वास के खिलाफ़ लड़ रहा हूं। घृणा_द्वेष मानवों
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