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आज हसला आरसा, नि बोलला मला, कोनते रूप दाखवू मी तूला. तू फसवितो जगाला की स्व:ताला, हे कळतय का तुला. हो बघीतलय झाडाची पाने गळताना, उभ आयुष� read more >>
एक अशी ही वेळ असणार कानात गाणी सोडून, कीर्तनाची टाळ वाजणार. सोबती म्हणून फक्त चार भिंतींची सात असणार, आयुष्याची कमाई लुटणारे काही � read more >>
इरादा क्या हुआ हवाएँ बोल रही है पेड़ों से डोल रही है तारीखें मसरूफ़ है इस लम्बे सफ़र में आख़िर इस सफ़र में कुछ तन्हा होके गुजर गए हम read more >>
पैरों तले जमीन न थी जिसके, उसी को आसमान की चाहत थी। रात बिताई आँधी तूफ़ान में जिसने, उसको सपनो की उड़ान काफी थी। ये दिन भी बदलेगा एक द read more >>
मेरी खमोशी जान ले लेगी कभी ये मै नही मेरी अंर्तमन की आवाज है रोज तडपते है,लेकिन अपनो की परवाह होती फिर भी अंर्तमन मे खमोशी ही खमोशी है read more >>
चुन- चुन कर वो दाना खाती, सबके मन को, कितना भाती । कभी इधर तो कभी उधर, ऊँचे आसमान में उड़ जाती। एक डाल से दूसरे डाल पर, कितनी चेह-चाहती read more >>
दुर्योधन सोचा मन में, मुझे इसी की तलाश है। है भुज, बाण में जान, काट सकता अर्जुन के बाण, यह अर्जुन का काल है। बोला दुर्योधन, योद्धा के अपम� read more >>
मृदुभाषिणी हो तुम श्रमजीवी अथक हो तुम । वैभव की देवी तुम सत्यनिष्ठ प्रवृत्ति की तुम । read more >>
(मुक्तक छंद) पायल जब छनकती है आशिक सारे मचलते हैं। जो दिल पे एक सुनहरा लेख ही लिख डालते हैं। कहीं दूर रहने के बाद भी झंकार बनी रहे _ जो क� read more >>
(दोहा छंद) मध्यम और गरीब अब, हैं अति अति लाचार। दिन दिन बढ़ता जा रहा,महँगाई की मार।। दिन दिन बढ़ता जा रहा,नशा युवा में आज। बेकारी से त्� read more >>
(दोहा छंद) नर नारी खाए दवा,सुख का मिले न भोग। दिन दिन बढ़ता जा रहा,भीषण मय अब रोग।। दिन दिन बढ़ता जा रहा,महँगाई की मार। मध्यम और गरीब अब read more >>
(दोहा छंद) दिन दिन बढ़ता जा रहा, लोगों में अब लोभ। लेना चाहे पर माल को,जो है मनु पर चोभ।। दिन दिन बढ़ता जा रहा,दुनियां में अपराध। जैसे ज� read more >>
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