दुर्योधन सोचा मन में,
मुझे इसी की तलाश है।
है भुज, बाण में जान,
काट सकता अर्जुन के बाण, यह अर्जुन का काल है।
बोला दुर्योधन, योद्धा के अपम� read more >>
(मुक्तक छंद)
पायल जब छनकती है आशिक सारे मचलते हैं।
जो दिल पे एक सुनहरा लेख ही लिख डालते हैं।
कहीं दूर रहने के बाद भी झंकार बनी रहे _
जो क� read more >>