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कविताएँ
रंग घोलेंगे हम भी अपनी इन फिजाओं में
रंग घोलेंगे हम भी अपनी इन फिजाओं में थोड़ा ठहरो हम भी उड़ेंगे इन हवाओं में मांगी है मां ने मेरी खुशनसीबी अपनी दुआओं में रास्ते कठि�
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जिसकी जैसी भावना-वैसा ही हो काम
जिसकी जैसी भावना, वैसा ही हो काम। मनचाहा किसको मिला,रूप रंग रस नाम। ऐसा रखे विचार जो,पाए सही प्रकाश_ करें अगर अच्छा यहां,सुन्दर हो परि�
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शिक्षा का जब साथ हो- मिलता सब अधिकार
(मुक्तक छंद) शिक्षा का जब साथ हो, मिलता सब अधिकार। मनचाहा किसको मिला,पूर्ण धनिक परिवार। उनका रहता है सदा,खुशियों में दिन रात_ बाधा तो आ
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मनचाहा किसको मिला-बिरले ऐसे लोग
(मुक्तक छंद) मनचाहा किसको मिला,बिरले ऐसे लोग। पूर्ण करे सब आरजू,खूब करे वह भोग। पाया है वह कामनी,जीवन साथी खास_ खुशियों में जीवन कटे, स�
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सारी खुशियां तब मिले-साथी बनें गरीब का
(मुक्तक छंद) सारी खुशियां तब मिले, बढ़ते खूब प्रताप। समय बड़ा बलवान है,शुभ शुभ रहिए आप। साथी बनें गरीब का,उनको दें अति प्यार_ चाल चलें य
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समय बड़ा बलवान है-करें नहीं यूं व्यर्थ
(मुक्तक छंद) समय बड़ा बलवान है,करें नहीं यूं व्यर्थ। साथ समय के जो चले,समझे जीवन अर्थ। मिले समय का साथ तब,करें सदा सम्मान_ सुख दुख पहलू �
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सावन जल बरसे अभी-चमक रही है दूब
(मुक्तक छंद) सावन जल बरसे अभी, चमक रही है दूब। हरी चुनरिया ओढ़कर,धरती लगती खूब। काले बादल मस्त है,वसुंधरा है मग्न_ जो देती है अति खुशी,च�
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कलकल चंचल जल दिखे-बांध हुआ है भग्न
(मुक्तक छंद) कलकल चंचल जल दिखे, बांध हुआ है भग्न। बरसे सावन झूम के,सभी नदी जलमग्न। मस्त सरकार सो रहे,आनन फानन काम_ सड़कों का भी लय बुरा,ज�
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तुम मुझे वोट दो-बदले में नोट लो
चुनाव प्रचार जोरों पर था, मंत्री जी को असीम डर था। कहीं इस बार कुर्सी फिसल न जाए, सत्ता हाथ से निकल न जाए। जगह- जगह प्रचार पे, नेता जी �
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अपनों से मिलना रहे- मन में अति अनुराग बरसे सावन झूम के
(मुक्तक छंद) अपनों से मिलना रहे, मन में अति अनुराग। बरसे सावन झूम के,लगे रंगीन बाग। भक्ति माह है यह अभी,भक्ति भाव में लोग_ भोले की महिमा
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बरसे सावन झूम के-लाया दिव्य निखार रग रग में है प्यार
(मुक्तक छंद) बरसे सावन झूम के,लाया दिव्य निखार। पुरुष स्त्री सब सौम्य है, रग रग में है प्यार। जलमय जलमय है यहां ,पानी में है जोश_ भींग भी
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भीनी भीनी हैं खुशी-हरी चुनरिया ओढ़कर सजे हुए हैं फूल
(मुक्तक छंद) भीनी भीनी है खुशी, समय हुआ माकूल। हरी चुनरिया ओढ़कर,सजे हुए हैं फूल। सजे सजे सब नवदिखे,भूमि बनी महबूब_ लोगों में है अति खुश
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