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कर्तव्यों के बेड़ी तले- अब कटते हैं दिन रात
(मुक्तक छंद) एक दौड़ था जब गम का मतलब भी नहीं था पता। हर गम तकलीफ़ खुशियों का ही है लगता था पता। कर्तव्यों के बेड़ी तले अब कटते हैं दिन र�
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सावन आए मस्ती छाए- सबको है अति खुशी
(मुक्तक छंद) सावन आए मस्ती छाए सबको है अति खुशी। हरा हरा नव हुआ पेड़ पौधा देता अति कुशी। विचरण करते काले_काले बादल दिखे आतुर _ जिसके भय �
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दिल का आलम कह रहा है-हमें तुम से प्यार है
(मुक्तक छंद) दिल का आलम कह रहा है हमें तुम से प्यार है। किसी तोफे का मुझे बेसब्री से इंतजार है। मैं ये तमाम जिंदगी तुझ पर ही कुर्बान किय
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गाल तुम्हारे रसगुल्ला से कम तो नहीं
(मुक्तक छंद) गाल तुम्हारे रसगुल्ला से कम तो नहीं। हरेक अंग किसी अप्सरा से कम तो नहीं। जिसके आने से नहीं होता है अँधेरा_ तुम तो यार सूर्�
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क्या हो गया आज लोगों को-बात बात में लड़ जाते हैं
(मुक्तक छंद) क्या हो गया आज लोगों को बात _बात में लड़ जाते हैं। ईर्ष्या की आग में जलकर लोग स्वयं भस्म हो जाते हैं। खुद मत जलें भाइयों इस
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हम बेटी है कोई सामान नहीं है-जितना सोचते हो उतना आसान नहीं है
जितना सोचते हो उतना आसान नहीं है हम बेटी है कोई सामान नहीं है जब चाहें जैसे उपयोग में लाओ तुम रौब अपना हम पे दिखाओ तुम इतने गुमनाम नही�
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दोस्तों कि डोर दबाते रहिये-पुराने साथियों को सताते रहिये
दोस्तों कि डोर दबाते रहिये, पुराने साथियों को सताते रहिये। प्रेम और क्रोध को जताते रहिये, कभी हाले दिल बताते रहिये। कभी अपनी खबर सु�
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दिन बीतने को है- और अभी तक सोचा तक नहीं
दिन बीतने को है और अभी तक सोचा तक नहीं यह रिश्ते जो जकड़े हुए हैं अपनों से अकड़े हुए हैं इन आंसुओं को लोगों में बांट दूं या बारिश की बू�
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धीमा जहर बनकर तुम मेरी जिंदगी में आए-खुशियों से भरा था जीवन
खुशियों से भरा था जीवन उड़ रही थी मैं पंख फैलाए नैनो में भरी थी आशा तन से युवान खुशबू आए फिर धीमा जहर बन कर तुम मेरी जिंदगी में आए आशाओ�
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मात पिता पर कविता-माँ की ममता पिता का स्नेह
माँ की ममता, पिता का स्नेह, जीवन के साथी, बिना उनके अधूरा रहे नहीं। बचपन के सपने, माँ-पापा के आशीर्वाद, जीवन की दौड़ में, हमेशा समर्पित र
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मुक्तक-दूरी की ही बात अगर है दूर आज उल्लास बहुत है
दूरी की ही बात अगर है दूर आज उल्लास बहुत है क्षण क्षण में यह विपदा आई मानो कही सिन्धु बह आई । तुम्हें देखने से पहले मस्तक पर कुछ छप जात
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मानो बस इंसान हो-किस बात से हैरान हो
किस बात से हैरान हो मानो बस इंसान हो। कर्तव्य से परे ना हो धर्म का अभिमान हो। किस बात से हैरान हो मानो बस इंसान हो। जो तुम्हारे हाथ �
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