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कविताएँ
हम भारत के लोग-विभिन्नताओं में भी एक हैं
(मुक्तक छंद) हम भारत के लोग विभिन्नताओं में भी एक हैं। नेक हृदयवालों के लिए दिल से हम भी नेक हैं। भयानक मौत हूं दुश्मनों के लिए सभी हाल �
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भरे खजाना खूब ही-बड़ा करे आकार
(मुक्तक छंद) पहले जैसे अब कहां,पानी हवा जुगार। मिले मिलावट में सभी,छीने पर अधिकार। चौधरी बनकर तब चले,और दिखाए रोब_ भरे खजाना खूब ही,बड़�
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देखें मंजिल को सदा-करें सुखद तब आज
पहले जैसे अब कहां,छलियों का है राज। छलते कोई भी यहां,बनते फिरते बाज। ऐसे में मुश्किल बड़ा,रहना पड़ता तेज_ देखें मंजिल को सदा,करें सुखद
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चैन रैन आराम-पहले जैसे अब कहां
(मुक्तक छंद) पहले जैसे अब कहां,चैन रैन आराम। चिन्ता सोते जागते,फिर भी हो बदनाम। मगर बुरा तो मत लगे,रहिए तो भी खुश_ यही कला तो खास है,करते
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चक्कर काटे खूब तो-खुशी भरी हो रात
(मुक्तक छंद) चक्कर काटे खूब तो,खुशी भरी हो रात। बादल काजल है लगे,पानी है अभिजात। सावन करे कमाल नित,आए मन में प्रेम_ भोली सूरत सामने,करती
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पहले जैसे अब कहां-प्यारे प्यारे लोग
(मुक्तक छंद) पहले जैसे अब कहां, प्यारे प्यारे लोग। लगे हुए सब होड़ में,और बढ़े नव रोग। संकट में ही सब दिखे,उमस भड़ी है बात_ अपना अपना सब क
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एक दिन बादशाह ने पुकारा सबको
हास्य रस की कविता सुनाते हैं, जिससे हंसी का आगमन हो जाता है। खड़ा हूं दरबार में एकदूसरे के सामने, चिढ़ रहा हूं अपने मित्रों के साथ मज़�
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चाहे जैसा हाल करो-चाहे जितना आघात करो
मेरे प्रचलित मंतव्यो पर चाहे जितना घात करो वही रहेंगे सोच विचार चाहे जितना आघात करो। तरह-तरह के भेद सुना कर तुम भूल गए हम क्या थे मो�
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मुझमें भी सहारा ला दें-मैं बह चला हूँ उस दरिया के पार
मुझमें भी सहारा ला दें मैं बह चला हूँ उस दरिया के पार न है दोस्त मेरा, न है यार आँखें भी अब किश्ती बनकर डूब चुकी है जो बेइंतिहा किसी की �
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मुझमें भी सहारा ला दें-मैं बह चला हूँ उस दरिया के पार
मुझमें भी सहारा ला दें मैं बह चला हूँ उस दरिया के पार न है दोस्त मेरा, न है यार आँखें भी अब किश्ती बनकर डूब चुकी है जो बेइंतिहा किसी की �
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भविष्य से खिलवाड़-ही धर्म समझतें हैं
बाल केंद्रित शिक्षा का, ढोल बजाया करतें हैं ऊपर बैठे लोग नित,नए नियम बनाया करते हैं विद्यालय में क्या होता, क्या कभी खबर लेते हैं मानस
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भविष्य बढ़िया हो जिसके लिए- हम सब अच्छी नस्ल की बीज बोते
(मुक्तक छंद) बरसात के मौसम में लोगों के जुवां पर प्यार भरे शब्द होते। भविष्य बढ़िया हो जिसके लिए हम सब अच्छी नस्ल की बीज बोते। गुलिस्त
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