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जलाओ न मेरे लिए तुम दीवाली-मेरे दुख के बादल छटेंगे

VIVEK KUMAR PANDEY 29 Jun 2023 कविताएँ दुःखद दुख, व्यथा, मृत्यु 55604 0 Hindi :: हिंदी

जलाओ न मेरे लिए तुम दिवाली,
तुम्हारे लिए मैं जला न सकूँगा।
बिछड़ जायेंगे हम अकेले - अकेले,
न तुम साथ दोगे न मैं साथ दूँगा।।

हृदय में मरण का है उल्लास कितना,
तुम्हारी विरह में है क्या खास इतना।
निष्कृति मेरी है ये विरह की अग्नि,
बुझाना भी चाहूं बुझा न सकूंगा।।

न तुम प्रीति पालो न मुझको बुलाओ,
न तुम खुद ही रोओ न मुझको रुलाओ।
है निर्जल नयन और रसिका भी सूखी,
व्यथा अपनी तुमको बता न सकूँगा।।

सुनो अब मेरी जिंदगी थम रही है,
तुम्हारे बिना नब्ज़ भी जम रही है।
ऐसे में कैसे बुलाऊं तुम्हे मै,
न तुम आ सकोगे न मैं आ सकूंगा।।

मेरे दुख के बादल छटेंगे  कभी न,
ये नयनों की वर्षा रुकेगी कभी न।
ऐसे में प्रतिपल मुझे याद करके,
न तुम रह सकोगे न मैं रह सकूंगा।।

जलाओ न मेरे लिए तुम दीवाली,
तुम्हारे लिए मैं जला न सकूंगा।
बिछड़ जायेंगे हम अकेले - अकेले,
न तुम साथ दोगे न मैं साथ दूंगा।।

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