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रिमझिम - रिमझिम बरसात हुई है, बादलों से मुलाकात हुई है। बूंदों से आज बात हुई है, हरियाली की सौगात हुई है। बिजली की चमकार हुई है, आज पहल read more >>
जब शाम होने लगे, पंछियां घोसलें में लौटने लगे। जब सूरज ढ़लने लगे, तब प्रियतमा तुम लौटकर आना। जब मेरी बेताबी बढ़ जाए, तुम्हारी यादों का स� read more >>
क्या राम बना कोई ? राम को तुमने सजाया मंदिरों में, राम को तुमने किताबों में लिखा। पात्र सारे जीवित रहे, टेलीविजन के चित्रपट पर, पढ़ा ग� read more >>
जमी हुई थी रंगभूमि, शोभित दिग्गज दीप्ति से दमक रहे। मानों एक साथ नभ में, कई सूरज चमक रहे। स्फार रश्मियाॅं स्फुटन से, अंबर आभा -सी फूट रह� read more >>
चल रही हूँ जिन्दगी के कंटीले रास्तों पर कुछ पा ली है मंजिल कुछ अभी बाकी है कभी हसीना कभी एक पहेली सी लगती है ये जिंदगी कभी पकाऊ कभी उ� read more >>
खोट आहे जे तू सांगतोस, कि प्रेम नाही करत, खोट आहे जे तू सांगतोस, कि प्रेम नाही करत, तरीपण.. लपून मला पाहतोस... जर हे खरय... तरं का मनाला र� read more >>
मानवता स्थापित हो, इसके लिए- आदिकाल से लोग लगे हैं..! आज तक- मानवता स्थापित नहीं हुई..! तो जनाब जरा सोचिए, जब तक ख़ुद में- मानवता स्थापि� read more >>
एका अनोळखी व्यक्ती सारखी आलीस तू , वृद्यात स्वप्नाच घर बनउन गेलीस तू . जणू काही क्षनाचा बस चा प्रवासच घडला, तुझ्या सोबत चा, तुझ घर आल आण� read more >>
बालासोर की दुर्घटना रेलयान गन्तव्य छोड़कर हुआ रवाना यमपुर को कैसे लिक्खूँ मुसाफिरों के मर्म भेदी क्रन्दित सुर को? क्या-क्या सपने read more >>
बालासोर की दुर्घटना रेलयान गन्तव्य छोड़कर हुआ रवाना यमपुर को कैसे लिक्खूँ मुसाफिरों के मर्म भेदी क्रन्दित सुर को? क्या-क्या सपने read more >>
रेलयान गन्तव्य छोड़कर हुआ रवाना यमपुर को कैसे लिक्खूँ मुसाफिरों के मर्म भेदी क्रन्दित सुर को? क्या-क्या सपने लेकर जब बो चले हुए हो� read more >>
जिज्ञासा की महफिल सजी है, आवाज़ बस ज़रा सी ऊँची है। खोज रंगों की रचना में, विचार विपणन की भूमि है। हर रोज़ नए सवालों की धूंध में, जीवन � read more >>
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