Join Us:
दिशा-लाइव ग्रुप ने लॉन्च किया नया ब्रांड BizPry - लोकल से ग्लोबल तक 20 मई स्पेशल -इंटरनेट पर कविता कहानी और लेख लिखकर पैसे कमाएं - आपके लिए सबसे बढ़िया मौका साहित्य लाइव की वेबसाइट हुई और अधिक बेहतरीन और एडवांस साहित्य लाइव पर किसी भी तकनीकी सहयोग या अन्य समस्याओं के लिए सम्पर्क करें
रुको ठहरो जिंदगी कहती है हमसे एक मोड़ पर जब सामने आते हैं हमारे जिंदगी के तीन रास्ते, यह तीन रास्ते मौत दर्द भरी जिंदगी और तीसरा जो हमने read more >>
मन करता फिर, एक बच्ची बन जाऊँ। कुछ हसींन यादों को , फिर बचपन में पाऊँ।। मेरा रूठना और माँ का मनाना, उन यादों में खो जाऊँ । और दौड़-दौड़ read more >>
असत्य की हार तय है मानो, सत्य का पक्ष लेना है जागो। वीरता के पूजक बनो, लोभ, भीरुता, को अंतर्मन से त्यागो। ओझल दिखने वाले ये सब अंधियारे read more >>
कविता -मां को शीश नवाते हैं जिस मिट्टी की मूरति को, गढ़ गढ़ हमी बनाते हैं शाम सुबह भूखे प्यासे, उसको शीश झुकाते हैं सजा धजा कर खुद सुं read more >>
न्यनों में स्वप्न, चाहत्त में निष्ठा, और ज्ञान में सम्मान रखे! है चलत्ता रहा ले प्रेम धरा का, संघर्ष दिप्त्त अभीमान रखे!! ज़ो read more >>
" महात्मा गाँधी " दो अक्टूबर जन्म दिवस है, दो अक्टूबर जन्म दिवस है, महात्मा गाँधी महान की, राष्ट्र पर्व भारत का यह दिन, राष्ट्र पर्� read more >>
साहब, सबकी पड़ती है पार। समय नहीं करता, किसी का इंतजार। वक़्त सब पर, करता है एतबार। जाते -जाते रह जाता, वही बनता सरदार। किसी के जाने से, read more >>
म्हारी प्यारी खेजङी, ऊनाळै सियाळै तुं रेवै हरी-भरी, काळा हिरण थारै छिंया मे कुचाळा मारै, जद ऊनाळै मे सगळा वृक्ष सूख जावै। पण तुं किंया हरी-भरी रेवै, जेठ री लू मे तुं एकली खङी मुस्करावै, जीव थारी छींया मे बैठ अर जान बचावै ऊनाळै मे पाणी घणी घणी कोसा तांई नी मिळै, पण तुं खेजङी हरी-भरी रेवै। जेठ रै तीखै तावङीयै मे जींवा रै होठां माथै, फेफ्फियाँ आ जावै पण तुं युं खङी मुस्करावै, मारवाङ रा किसान थारी साँगरी ने गणै चावै सुं खावै, थारै लूंख ने खा'र अणूता ऊँठ अरङावै। धन्य धन्य थारी छाँव खेजङी, म्हारी रुपाळी प्यारी खेजङी। मिंमझर, साँगरी और खोखा देवै, थारो हाथ कदी न खाली रेवै। चिङी कमेङी री आश्चर्य दाता है तुं, केर,बोरङी अर किकर री साथी तुं। मारवाङ री शान खेजङी, म्हारी प्यारी रुपाळी खेजङी। - कवि सुनील कुमार नायक
म्हारी प्यारी खेजङी, ऊनाळै सियाळै तुं रेवै हरी-भरी, काळा हिरण थारै छिंया मे कुचाळा मारै, जद ऊनाळै मे सगळा वृक्ष सूख जावै। पण तुं किंया read more >>
शीर्षक (माँ दुर्गा) मेरे अल्फ़ाज़ (सचिन कुमार सोनकर) तू ही दुर्गा तू ही अम्बे तू ही वैष्णो रानी है। तुझमे ही ये संसार समाया तू ही पर्वत वा� read more >>
किन्नर हो तुम दूर रहो ये शब्द कितना कडवा है.. ... दुःख से भरे इस जीवन में अब कौन अपना है... घर से तिरस्कृत हुऐ दुनिया से गिला क्या.. हर जगाह � read more >>
देखते- देखते, सब कुछ बदल गया। सुख -सुविधाओं के नाम पर, ज़माना छल गया। घरों में चूल्हों के लिए, काम आती थी मिट्टी। गैस चूल्हे ने जड़े जम� read more >>
गांव 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐******************************** प्यार मोहब्बत की बाते, हँसी - खुशियों की सौगात। अमन - चमन और खेलकूद में, बितायी हमने दिन रा� read more >>
Join Us: