जहां आप, अपने रहकर भी हो लुप्त।
आप ही सुस्थ, बाक़ी सब सुस्त।
जिस शिखर पर आप, अपने बहुत पीछे छूट जाएं।
चाहकर भी आपका, नजरों से नाता टूट जा� read more >>
अच्छाई के पैर किनारा नहीं पाते,।मगर,
सदैव अमृत तक पहुँच जाते हैं,,।।
वक़्त के आगे भला किसका पहरा है,।
जो जिय, गया, मुस्कान के साथ,।मगर,
उस read more >>
हम वहां मिलेंगे......
जहां ना जाति बंधन होगा,
ऊंच- नीच का क्रंदन होगा,
होगी सब खुशहाली वहां पे,
सांपों से मुक्त चन्दन होगा।
हम वहां मिलेंग� read more >>
कविता -ख्वाइश
सुख जैसे कुछ
पाने की
दुःख जैसे कुछ
खोने की
कुछ खाने कुछ
पीने की
जग में जीवन
जीने की
"ख्वाइश"है।
नभ में खग सा
उड़ने read more >>
मेरे हृदय में तुम हो -
पर मेरे प्रेम से अलक्षित तुम हो ,
तारों से झिलमिलाता आसमान ;
अंग - अंग में तेरी प्रेम का पहन - वसन -
मुस्कान तेरी चाँ� read more >>