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चंद्रशेखर आजाद
कविता- चंद्रशेखर आज़ाद हिंद के शेर ओजस्वी स्वतंत्रता सेनानी। अंग्रेजों से लोहा लिया सपूत बलिदानी।। बचपन से सीखा धनुर्विद्या निशा�
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मणिकर्णिका
कविता- मणिकर्णिका भारत की आन-बान-शान, मराठा झांसी की रानी। राज्य क्रांति की वीरांगना, संघर्षों से भरी है कहानी।। शास्त्रों की शिक्ष�
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गांव की गलियां
मैं शहर में आके भूल न पाया गांव की वो कच्ची गलियां जो हल्की बारिश होने पर फिसलन से भर जाती थीं जो तेज धूप में जल के नन्हें पांव जलाती�
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दिशा पर कविता
कविता -दिशा कहां जा रहे हो? न ठौर न ठिकाना चले जा रहे हो कहां पर? बताना मंजिल कहां है? कहां पर है जाना? दिशा वह कौन है? किधर हो रवाना? पथि�
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मेंहदी पर कविता
कविता -मेहदी का रंग मेहंदी का रंग अपनों के संग लाती है अपनों में प्रेम का अनुबंध, खुद पिसती है घिसती है पत्थरों के बीच और महका जात�
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एकावली छंद "मनमीत"
किसी से, दिल लगा। रह गया, मैं ठगा।। हृदय में, खिल गयी। कोंपली, इक नयी।। मिला जब, मनमीत। जगी है, यह प्रीत।। आ गया, बदलाव। उत्तंग, है चाव।।
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चौपई छंद "चूहा बिल्ली"
(बाल कविता) म्याऊँ म्याऊँ के दे बोल। आँखें करके गोल मटोल।। बिल्ली रानी है बेहाल। चूहे की बन काल कराल।। घुमा घुमा कर अपनी पूँछ। ऊपर न
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गंग छंद "गंग धार"
गंग की धारा। सर्व अघ हारा।। शिव शीश सोहे। जगत जन मोहे।। पावनी गंगा। करे तन चंगा।। नदी वरदानी। सरित-पटरानी।। तट पे बसे हैं। तीरथ स�
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"अद्भुत सावन"
कविता "अद्भुत सावन" सावन मास बड़ा निराला। हां पल पल में घटाएं छाती।। थे बिन पानी मुरझाए चेहरे। कब धरती भी
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Acter
वो एक्टर जो दूसरों को नसीहतें देता था, एक दिन उसे भी पान-मसाले का एड मिल गया.
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Kabja
वो ग्रह जिस पर हमने अपने ख्वावों का घर बसाया था, उस पर भी कब्जें की होड़ शुरू हो गयी हैं.
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Thagi
हमारे प्यार में आखिरकार ठगी तो होनी ही थी, तुमने अपने माँ - बाप को ठगा था , मैनें अपने.
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