मुनासिब नहीं मेरा किसी पर भी बरस जाना,।
मैं उस पगडंडी पर ,बिना धाप किए चल रही हूं,
जहां एक कांटा कुरेदता है , मेरी कदमों के तलवे को,मगर
को read more >>
मैं कोशिश करता ‌हू पर हर बात बिगड़ क्यों जाती है।
खुशियां मेरे जीवन में आने से पहले फिसल क्यों जाती है।
मैं करना चाहता हूं सब अच्छा प� read more >>