अरसे बाद,खुद को पहचान पाई हूं,
ये मेरे अहसास की सुगन्ध है,।
समय का इक पहलू ,मेरा बड़ा भयभीत रहा ,
फिर भी मुसाफिर इक जिन्दाबाद रहा,।
ज़िन्� read more >>
# बारिश का मौसम ...
बारिश का मौसम ,
बदरा बरसे झमाझम ...!!
नील गगन में खो गए ,
सूरज चांद सितारे
दुर्लभ हो गए इनके दर्शन,
बारिश में घुल गए सारे . read more >>
कौन कहता है कि मां सिर्फ धरती पर हो तब साथ होती है.....
हमारी पहचान उसके संस्कारों से होती है.....
उसकी आवाज हमारे दिलो में धड़कनों को तरह हो� read more >>
शृंगार छंद "तड़प"
सजन मत प्यास अधूरी छोड़।
नहीं कोमल मन मेरा तोड़।।
बहुत ही तड़पी करके याद।
सुनो अब तो तुम अंतर्नाद।।
सदा तारे गिन का read more >>