उम्र की सीमा नहीं ,है ,किस पार जाना,।
कविता कहती है,सफर वहाँ तय हो,
सन्नाटा रहित पनघट जिधर हो,।
तब कहीं छलके भी तो ,यह आंखों का नीर ,
व्यर्थ read more >>
हां, ज़माना बदल रहा है।
यह,समाज को छल रहा है।
बच्चे, दादा-दादी के, सानिध्य में रहते थे।
एक था राजा, एक थी रानी, किस्से सुनते थे।
बहन, बेटी � read more >>
ये लाइन आजकल के कवियों के लिए
की कवियों के इस मेले में ,न जाने कितने झमेले हैं,।
मैं,लिखती हूँ ,मिटाती हूँ,।मगर ,इक बात पे आती हूँ,।
वाहवा� read more >>
मां का प्यार
हमने तुम्हे प्यार किया अपनी जान से ज्यादा ।
तेरा दिल तोड़ने का मेरा कोई नही था इरादा ।
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कांच के कंगूरे, कांच की दीवार।
रहने वाले कांच के, कौन करे पत्थर से वार?
इस दुनिया में कांच के, चिरक ढांस हैं घर।
रहने वालों में, अजीब -सा स read more >>
तू मंजिल है मैं किनारा ।
तू साथ दे या ना दे हमारा ।।
चल कहीं दूर चले ।
मंजिल के पीछे हम क्यों परे ।।
मत कर इधर उधर की बात ।
तो मंजिल कभी � read more >>