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👉🤔জে দেশ চায __🤫👈
এই মোহা ভারতের কর্ম ভুমী, ক্ণ - কন জার লোখো প্রেম ধরে! প্রাকৃতী উজ্জবল অরূন, পবন, জার ধার - ধার তে রন্গ ভরে!! এই ভাসিযে রাখে অধিকাধি�
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दीप जलाकर
कुछ दीप जलाओ ऐसे जो हृदय चीर दे तम का हो आशाएं शून्य शिखर पर मन मे ये सोच रखो कुछ कर जाए ,कुछ कर जाए। दीपक का उजाला प्रकाश दे
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मंजिल की राह में
शीर्षक " मंजिल की राह में" हम निकले तो धूप हुई पांव लगे जलने मेरे रात काली डरावनी ठंड से भरी शीतो वाले सवेरे
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बगिया
शीर्षक। " बगिया" फिर बसंत आएगा अभी तो मौसम है पतझड़ का खिलेंगी कलियां बैठेंगे भौंरे आनंद उठाएं
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एक कदम लक्ष्य की और
शीर्षक। " एक कदम लक्ष्य की ओर" तू राही है इन गलियों का अभी कहा तू रुक जायेगा तलाश है जो तुझको मोती क�
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आशाओं का रेखा पर
आशाएं है शून्य शिखर पर मन में कुछ सवाल हर मोड पर कुछ रुक जाना हर रास्ते पर पूर्णविराम जीवन अंधेरे में दीप �
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साहसी विद्यार्थी
"साहसी विद्यार्थी" अंधेरे से कमरे में एक मैं और एक मेरा सपना वो जलती मोमबत्ती वही पढ़ाई का टेबल
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चांदनी रात
"चांदनी रात" रात प्यारी सुहानी सी कुछ अच्छी कुछ डरावनी सी चांद निकलने वाला है अभी रात कहा हुई अभी घर में उ�
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बेरोजगारी
बीतते हुए साल में महामारी और रंजिशो के हाल में रिश्तों की टूटती डोर को आओ मजबूत करे इस नए साल में आशाओं जिम्मे
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राग विरागिनी
" राग - विरागिनी" मन है चंचल मन है विहवल एक प्रेम रागिनी फिरती है मन में पीड़ा लिए हुए राग- विराग में चलत�
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सच्चा राही
"सच्चा राही" निकल पड़ा तू रास्ते पर मन में कुछ अरमान लिए दुनिया को अपना मान कर कुछ करने की अब ठा�
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ठंड की धूप
"ठंड की धूप" कुछ बादल काले काले कुछ पानी से भरे हुए है कुछ ढक लेते सूरज को धूप नही आ पाएगी ये बादल देखो कितन
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