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लिखने को तो हम बहुत कुछ लिख सकते हैं, लेकिन आज के दौर में सब कुछ लिख चुका है और बहुत अच्छे अनुभवी लेखक हुए हैं| उन्होंने कोई भी शब्द गलत न� read more >>
मेरी ताकत को कौन बताए, जो लिखे वो समझाए ! मेरा लिखा मिट न पाए , लिख दे ,किसी का तकदीर , जीते जागते आदमी भी बन जाए ,फकीर ! रूठ जाऊ तो मेरा नसी� read more >>
//... अंतर्द्वंद ...// --------- --------- --------- मन की भट्टी , तपती भावनाएं , देती यातनाएं मुझे मेरी ही कामनाएं ...! देखता हूं प्रेम से , जब तुम्हारी ओ� read more >>
उन पलों को कैसे भूलें हम, जो कॉलेज मे बिताया करते थे। वो दिन थे पढाई करने के, तब शोरगुल मचाया करते थे॥ फुलझडी नोट बुक मांगा करती थी, बुक � read more >>
व्यथित मन मेरा यह व्यथित मन ढूँढ रहा न जाने किसको कभी लगता है पिंजरे में बंद उस पंछी की तरह न जाने खोए हुए अनजाने सपनों की तस्व read more >>
मैं एक इन्सान - निर्धन की संसार ; शिति - दीन हूँ , मुझे कहीं जगह ना मिला - इसलिए उत्पीड़न की गर्भ में लिया स्थान ; मैं आधि - व्याधि की गर्भ से � read more >>
नत नयन मेरी दृष्टि - दो नयन में ! दो बूँद अत्रु लेकर ; घर की चूल्हा देखकर , ऐ कैसी तेरी सृष्टि - रे भगवान , हे अल्लाह , ठंड पड़ चुकी थी चूल्हा ; read more >>
कुछ शब्द मेंरे कलम से ✍️✍️✍️✍️ बचपन का वह दिन प्यारा, जब याद आने लगती है। गुजरे हुए लम्हे की मस्तियां, यूं मन को सताने लग� read more >>
क्यारी में, फुलवारी में, हंसती है फाग जवानी। झूमे मंजरी संग तितली, फाग की अगवानी। बौराए, मधुमास में, भौंरा-भौंरी सारंग। प्यार पुराने ज� read more >>
रोटियां खिलाने वाले खुद भूखे सो रहे अन्न उगाने वाले को हैं दीमक खा रहे जो किसान हैं वो अब किसान लगते नहीं वड़े वड़े व्यापारी किसान ब read more >>
भरम वाला निशाचर डराने लगा है सपने में भी भयभीत करने लगा हैं रोज़ रोज़ नए नए तरह तरह के वादे खौफ ज्यादा दिखाने लगा हैं कुर्सी की नीत� read more >>
मतदान हो रहा था, वोटर सब खड़े थे। बगुले सा मग्न हो, नेतागण अड़े थे । सड़कों पर भीड़ थी, सब लोग खड़े थे, फुसुर फुसुर बाते, बातों से बड़े � read more >>
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