शीर्षक - हौसला अभी बाक़ी है
गिर कर भी उठने का हौसला अभी बाकी है,
हार कर भी जीतने का हौसला अभी बाकी है ,
मार्ग भटक कर भी गंतव्य तक पहुँचने क read more >>
एक दिन अकेला बैठा था में ना कोई नाम था मेरा न थी कोई पहचान l
सोच रहा था क्या करूंगा क्या बनूँगा अपने मकसद से था बिलकुल अनजान ll
नदी के परव� read more >>
न जाने आज कितनों को चाँद के आने का इंतजार है,
चाँद भी आज इतनी आसानी से प्रकट होने को नहीं तैयार है ,
चाँद को भी पता है की हमेशा उसका होता न read more >>
अबोध बालपन -
कितना नादान -
बड़ा होकर बनू किसान ;
यहीं सोचता रहा -
एकाग्रता से पिता का श्रम देखता रहा -
मेरा नादान बालपन सपना सजाता रहा -
बा� read more >>