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चारों तरफ महंगाई के साए हैं न्यूज देखी तो पता चला अछ्चे दिन आए हैं आज की महंगाई में बाजार का यह हाल है ग्राहक पीला और दुकानदार लाल है क� read more >>
तू अगम कोई अनोखा है नहीं इस विश्व भर में घुट रहा है , शीश के नीचे कोई कन्धा नहीं है।। ईश ने सबको दिया अधिकार जब स्वच्छन्द का तो कोयलें � read more >>
शीर्षक - हौसला अभी बाक़ी है गिर कर भी उठने का हौसला अभी बाकी है, हार कर भी जीतने का हौसला अभी बाकी है , मार्ग भटक कर भी गंतव्य तक पहुँचने क read more >>
एक थी धारा 370 जिससे अंधकार था घाटी में, मोदी ने आ कर मिटाया भारत की परिपाटी से। जहां बलिदान हुए मुखर्जी वो कश्मीर हमारा है, अखंडता के इ� read more >>
वह नर मुंडो वाली चामुंडा भी बेबस बैठी थी घाटी में l बर्फीले बर्फानी पर भी धूल जमी थी घाटी में ll उठो भैरब अब लक्ष्य साधो खड़क खप्पर कृपा� read more >>
मेरे देश के सिपाही बढ़ने लगे है आगे, उद्धघोष संस्कृति का मेरा देश कर रहा है। जय घोष संस्कृति का मेरा देश कर रहा है , हम सब है भारतवाशी मे read more >>
एक दिन अकेला बैठा था में ना कोई नाम था मेरा न थी कोई पहचान l सोच रहा था क्या करूंगा क्या बनूँगा अपने मकसद से था बिलकुल अनजान ll नदी के परव� read more >>
अंगारित मन! कर शांत इसे, क्यों?भड़क रही यह ज्वाला है । क्रोध, शोक ओर ईर्ष्या, यह तो हलाहल का प्याला है।। जिसमें धँसता चला जा रहा है धीर� read more >>
मैं वर्णन करना चाहता हुँ माँ के ममता का लेकिन मेरी कलम की स्याही ही काम पड़ जाती है मैं वर्णन करना चाहता हुँ माँ के आँचल की लेकिन मेरी क� read more >>
न जाने आज कितनों को चाँद के आने का इंतजार है, चाँद भी आज इतनी आसानी से प्रकट होने को नहीं तैयार है , चाँद को भी पता है की हमेशा उसका होता न read more >>
जो निस्वार्थ भाव से चाहे किसी को । उस रिश्ते में पैसों का कोई दाम नही होता ॥ कुछ लोग अपने उसूल ही बदलते रहते । रिश्तों में छल बल का काम read more >>
अबोध बालपन - कितना नादान - बड़ा होकर बनू किसान ; यहीं सोचता रहा - एकाग्रता से पिता का श्रम देखता रहा - मेरा नादान बालपन सपना सजाता रहा - बा� read more >>
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