*"वक़्त की स्याही में लिपटी ज़िंदगी"*
किसी ने आज हंसकर पूछा, "कौन है वो.?"
हम भी मुस्कुराए, मगर जवाब यूँ दिया—
"किसी के कानों की बाली में जड़� read more >>
नील गगन के नीचे, जलधारा के बीच,
एक नाव चली, बहती रीतम - रीत।
नाव की देहरी पर बैठी कोई,
मानो स्वप्नों से आई जलपरी।
नयनों में गहराई, लहरों-� read more >>