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हमको जो कहते हो तुम , क्यों पीते हो हाला , पुरखे भी पीते थे ,तेरे दीवाने थे मधुशाला । नये नये है हम , ह� read more >>
ज़मीं पर बैठ, कभी चलती, कभी फुदकती है। कभी खा़मोश, कभी खालसा- सा गाती, कहां सुनती है? कभी फुर- फुर फुरती में। कभी सघन में सघन ढूंढ़ती है read more >>
निशा से चला - सारें दिशाओं से चला ; पाला लिऐ पवन , ठिठुर रहा रज़ाई - सारी रात - ठिठुर के रज़ाई में लूँ अंगड़ाई । जल्दी से उठो सूरज भाई - रा read more >>
नारी के सब रूप को,वंदन बारंबार जो करती सद्कर्म से, दोनों कुल उंजियार दोनों कुल उंजियार,सती श्री वीणा पाणी ममता करुणा मूर्ति, जगत की है read more >>
नगरों की गलियों गलियों में , मैंने ढूढ़ा तुमको मधु शाला बसती हो तुम जहाँ पर , तेरे ही दीवाने है मधुशाला तु� read more >>
माया की है दुनिया सारी, मतलब के दोस्त यार जिसके पास है पैसा, उसी से करें प्यार। खाली हाथ आता है, और खाली हाथ जाता है,, फिर भी जिन्दगी भर पै read more >>
मत कीजिए खराब, यू ही जल को। अच्छा रहे उनके लिए भी आने वाले कल को। स्वार्थ हित न कीजिए , प्रदूषित नदी को । यह जानते ह� read more >>
मैंने अपनों की, कभी पहचान नहीं की। मैं अपनों में भी, अपना ढूंढ़ता रहा। स्वार्थ छुरी से, उनका सर मूंड़ता रहा। मैंने कभी मीठी, ज़बान � read more >>
दोहा - चाम रंग श्वेत नहीं , मन भाव नीक होय रंगन पर मत जाइये अरि ,गुण देखो जो होय । read more >>
*परिवार* परिवार अब एकल हो रहे हैं घर कब मकान हो रहे हैं। दादा दादी अब खो रहे हैं नाना नानी किस्से हो रहे हैं।। मामा मौसी अब नहीं जानत read more >>
*परिवार* परिवार अब एकल हो रहे हैं घर कब मकान हो रहे हैं। दादा दादी अब खो रहे हैं नाना नानी किस्से हो रहे हैं।। मामा मौसी अब नहीं जानत read more >>
तु डर मत, तु लड़ तु अपने भीतर साहसों को भर। क्यों डरता है कि कल क्या होगा? जो आज मिला उसकी कद्र कर उसे खुशी से कर। यही है तुम्हारे मंजिल � read more >>
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