Kranti Raj 30 Mar 2023 ग़ज़ल अन्य 14154 0 Hindi :: हिंदी
जमाने से सिकवा शिकायत की है, रची जिंदगी मिट्टी लगती है ! प्रेम की मुरती मां से मिली है, पानी के बुंदे हरपल बरसती है !! कौन है,बसेरा जो हमे है,घेरा, मन की गंगा हरपल बहती है ! चंचल सबेरे यादो से घेरे , ममता की छाहो मे रब्ब बसती है !!