मोती लाल साहु 23 May 2026 ग़ज़ल धार्मिक #हिंदी_ग़ज़ल #गुरु_महिमा #अध्यात्म #भव_के_उस_पार #मोती #SpiritualPoetry 13391 0 Hindi :: हिंदी
न कर्म का बंधन कोई, न अकर्म की दीवार हो, मिले जो सतगुरु के चरण, हम मृत्यु के उस पार हों। ये आना-जाना, जीना-मरना, खेल है इस 'भव' का बस, पकड़ लें दामन गुरु का तो, इस जगत से ही पार हों। भटक रहा है जीव जग में, खोजता बैकुंठ को, जो झुक गया गुरु-चरण में, वो दुखों से बेज़ार हो। न पुण्य की चाहत रहे अब, न पाप का कोई डर रहे, मिले जो ऐसी बंदगी, जीवन का बेड़ा पार हो। मिट जाए 'मैं' का यह भरम, और नूर ही बस नूर हो, ऐ 'मोती' ऐसी नाव हो, जिस पर गुरु पतवार हो। -मोती