मोती लाल साहु 18 Jul 2025 ग़ज़ल अन्य ग़ज़ल ऐ नज़र#O Ghazal of the Gaze, खोज#explore, प्रेरणा#motivation, ज्ञान#knowledge, शायरी#poetry, मोती#Moti 15211 0 Hindi :: हिंदी
धरती किसी की नहीं,पर झगड़ते सारे हैं, दिल में खुदा है बसा,पर अशांति में सारे हैं। दौलत से सुख नहीं मिलता,ये जानती है दुनिया, फिर भी सुख को उसी में,क्यों ढूंढते सारे हैं। सुकून को ना मिली पनाह कहीं,ये कैसा हाल है, फिर भी अपनी शान में,क्यों इतराते सारे हैं। ये कैसा खेल देखो,तमाशा बन रहे खुद ही, अजब ये दुनिया का रंग,गजब इसके नज़ारे हैं। -मोती