Prashant Kumar 08 Apr 2023 ग़ज़ल प्यार-महोब्बत 16946 0 Hindi :: हिंदी
मुझको मां की खूब खरी-खोटी याद आती है रोज रात में उसकी लोरी याद आती है। बेबजह मिरा जब भी दिल धड़कने लगता तो मेरे गाँव की मुझको गोरी याद आती है भूख से किसी बच्चे को बिलखता देखूं तो मुझको मेरे बचपन की चोरी याद आती है। अश्क भी निकलते हैं उँगलियां भी जलती हैं मां के हाथ की जब भी रोटी याद आती है। होंठ मूंगे जैसे थे आंख झील जैसी थी घर के बाजू वाली वो मोटी याद आती है। जब किसी की बाहों में मैं किसी को देखूं तो फिर 'प्रशांत' की मुझको जोड़ी याद आती है।