Join Us:
दिशा-लाइव ग्रुप ने लॉन्च किया नया ब्रांड BizPry - लोकल से ग्लोबल तक 20 मई स्पेशल -इंटरनेट पर कविता कहानी और लेख लिखकर पैसे कमाएं - आपके लिए सबसे बढ़िया मौका साहित्य लाइव की वेबसाइट हुई और अधिक बेहतरीन और एडवांस साहित्य लाइव पर किसी भी तकनीकी सहयोग या अन्य समस्याओं के लिए सम्पर्क करें

अंदर का राम

मोती लाल साहु 29 Sep 2025 ग़ज़ल अन्य #इत्तेहाद (Unity) ​#फ़कीरी (Asceticism/Sainthood) ​#आंतरिकखोज (Inner Search) ​#राम ​#एकतानूर (One Light) ​#सियासत (Politics) ​#दार्शनिक (Philosophical) ​#मोती 15861 1 5 Hindi :: हिंदी

हर शय में वो नूर, वो एक ही चेहरा,
पर आदमी ने कहाँ इत्तेहाद देखा रे।

मंदिर, मस्जिद, गिरजा, गुरूद्वारे की क्या बात,
हर दिल की धड़कन में मैंने नाम देखा रे।

​सियासत का देखो कैसा ये है खेल,
बाँटता रहा इंसान को वो हर हाल।

राम के नाम पे होती रही कैसी जंग,
हर जीत में उसकी बस विनाश देखा रे।

​फ़कीरी में मोती ने ये जाना,
अंदर के राम को तू पहचान।

बाहर कहाँ ढूँढे, सब है तेरे भीतर,
जब खुद में झाँका तो अमरत्व देखा रे।
-मोती

Comments & Reviews

मोती लाल साहु
मोती लाल साहु ग़ज़ल का सरल भावार्थ ​इस ग़ज़ल का मूल विचार एकता (इत्तेहाद), आध्यात्मिकता, और आंतरिक शांति पर केंद्रित है। ​पहला और दूसरा शेर (एक ही सत्ता, अलग-अलग रूप) यह कि दुनिया की हर चीज़ में (हर शय में) एक ही रोशनी, एक ही चेहरा दिखाई देता है। यानी, एक ही परम सत्ता हर जगह मौजूद है। ​मगर इंसान ने इस एकता को पहचानना नहीं (आदमी ने कहाँ इत्तेहाद देखा रे), बल्कि वह हमेशा बँटवारे और अलगाव में उलझा रहा। ​आगे: यह कि मंदिर, मस्जिद, गिरजा, गुरूद्वारे में तो नाम अलग-अलग हैं, पर मैंने महसूस किया है कि हर दिल की धड़कन में एक ही नाम और एक ही आस्था है। यह बात है कि उपासना के तरीके अलग हो सकते हैं, पर सबके पीछे की भावना एक ही है। ​तीसरा और चौथा शेर (सियासत का खेल और धर्म के नाम पर विनाश) यह कि सियासत (राजनीति) के खेल पर दुख व्यक्त करता हूंँ, जो इंसान को बाँटता रहा और उसमें फूट डालता रहा। ​दुख की बात यह है कि राम जैसे पवित्र "नाम/Holy Naam" पर भी कैसी-कैसी लड़ाइयाँ (जंग) होती रहीं, और हर 'जीत' का परिणाम सिर्फ़ विनाश और बर्बादी ही रहा (हर जीत में उसकी बस विनाश देखा रे)। ​पाँचवाँ और छठा शेर (असली राम की पहचान) ​अंतिम शेरों में, 'फ़कीरी' (साधना या वैराग्य) में लीन यह ज्ञान प्राप्त हुआ कि असली राम या ईश्वर बाहर नहीं, बल्कि इंसान के अंदर मौजूद है। ​इसलिए, उस ईश्वर को बाहर मत ढूँढ़ो, वह सब कुछ तुम्हारे भीतर ही है (सब है तेरे भीतर)। ​जब मैंने खुद के अंदर झाँका (खुद में झाँका), अपनी आत्मा को पहचानना शुरू किया तब मुझे अमरत्व (हमेशा रहने वाला, कभी न मरने वाला सत्य) का अनुभव हुआ। ​निष्कर्ष ​ग़ज़ल का सीधा संदेश यह है कि ईश्वर एक है और वह हमारे हृदय के अंदर ही रहता है। हमें धर्म या राजनीति के नाम पर बँटना नहीं चाहिए, बल्कि अपने भीतर झाँककर उस एकता और सत्य को पहचानना चाहिए, जिससे वास्तविक शांति और अमरता मिलती है। ​यह आध्यात्मिक और सामाजिक चेतना से भरी एक बहुत ही मार्मिक रचना है! क्या आप ग़ज़ल के किसी ख़ास शेर का अर्थ और गहराई में जाना चाहेंगे? -मोती

9 months ago

LikeReply

Post a comment

Login to post a comment!

Related Articles

Sahil se poocho kinaro p kya likha h Lekhak se poocho kitabo m kya likha h Kyu dekhte ho tum jamane ki kmiyo ko Are khud s to poocho tumne kya kiya h read more >>
Dil mein jazbaaton ke hua tufan bhi nahin Rahe Pahle se hasin mere mehman bhi nahin Rahe❤️ Ye waqt Na jaane Kahan Le ja Raha hai mujhe Shahar mein is tehzeeb ke kadardaan bhi nahin Rahe❤️ Shauk jagah hai tabiyat mein gule afshani ka Magar mere aangan mein gulistaan bhi nahin Rahe❤️ Umre nadan nikal gayi alvida keh kar mujhe Mujp read more >>
पल भर भी तुम्हें हम अपनी यादों से हटा ना पाए चांदनी चली गई तो घर में शम्मा जला ना पाए💖💖💖 महफिल में जाते हैं तो तेरी याद आती है सनम तेरी read more >>
Join Us: