मोती लाल साहु 29 Sep 2025 ग़ज़ल अन्य #इत्तेहाद (Unity) #फ़कीरी (Asceticism/Sainthood) #आंतरिकखोज (Inner Search) #राम #एकतानूर (One Light) #सियासत (Politics) #दार्शनिक (Philosophical) #मोती 15861 1 5 Hindi :: हिंदी
हर शय में वो नूर, वो एक ही चेहरा, पर आदमी ने कहाँ इत्तेहाद देखा रे। मंदिर, मस्जिद, गिरजा, गुरूद्वारे की क्या बात, हर दिल की धड़कन में मैंने नाम देखा रे। सियासत का देखो कैसा ये है खेल, बाँटता रहा इंसान को वो हर हाल। राम के नाम पे होती रही कैसी जंग, हर जीत में उसकी बस विनाश देखा रे। फ़कीरी में मोती ने ये जाना, अंदर के राम को तू पहचान। बाहर कहाँ ढूँढे, सब है तेरे भीतर, जब खुद में झाँका तो अमरत्व देखा रे। -मोती
9 months ago