GAJENDRA KUMAR MEENA 30 Mar 2023 कहानियाँ दुःखद क्या लिखूं 117212 5 4.6 Hindi :: हिंदी
हमारे मन में अक्षर यह सवाल बार - बार उठता रहता है और अपने आप से पूछते रहते हैं कि हम क्या लिखे और कैसे लिखे ? लिखना कहा से आरंभ करें और कहा से नहीं करे ? यहीं सोच कर हम कुछ भी लिख नहीं पाते है, सब कुछ जानकारी और ज्ञान होने के बावजूद यह हाल होता है। कुछ लोगो का मानना हैं कि हमारा संबंध लिखने वाले साहित्य से बैकग्राउंड नहीं है और हमे एक अच्छी गाईडलाइन नहीं है। नहीं तो हम अच्छा लिख पाते और हमारे जीवन के ज्ञान को लोगो में शेयर या बाट सकते। लेकिन हमारा मानना है कि लिखना कहीं से भी आरंभ करें, बस हमे तो लिखना है। हमे जो ज्ञान है वह किसी ओर के पास नहीं हैं, जो हमारे जीवन की परिस्थितियां के अनुसार अनुभव से उत्पन्न होता है। इसलिए हमारा ज्ञान यूनिक माना जाता है। इसलिए लिखना कैसे है यह सोच कर हमे हमारा ज्ञान के मस्तिष्क को नहीं है, हमे जैसा आता है ऐसा लिखते रहो। गीता में कहा गया है कि " कर्म करते रहो, फल की इच्छा मत करो" वह तो कर्म के अनुसार फल मिल ही जाएगा। बस हमे तो लिखना रहना चाहिए । हमे क्या फर्क पड़ता हैं, दुनिया क्या कहे, दुनिया तो अच्छा- बूरा कहती रहती हैं। हमारे जीवन के अनुभव ज्ञान को लिखते रहो।
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I am son of former ,writer , online working teaching and politician. I know many languages like - 1...