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बारिश में मिली वह लड़की

Dharmpal Saroj 18 Aug 2026 कहानियाँ प्यार-महोब्बत लव स्टोरी की कहानी प्यार मोहब्बत इमोशनल स्टोरी, प्यार मोहब्बत हिंदी स्टोरी 2229 0 Hindi :: हिंदी

बारिश में मिली वह लड़की

शहर की उस पुरानी सड़क पर हर शाम एक अजीब-सी खामोशी उतर आती थी। सड़क के दोनों तरफ लगे पेड़ों से गिरती पत्तियाँ और दूर से आती ट्रेन की आवाज़ उस जगह को और भी रहस्यमय बना देती थीं।

उसी सड़क के किनारे एक छोटी-सी चाय की दुकान थी।

हर शाम ठीक छह बजे वहाँ एक लड़का आकर बैठता था।

उसका नाम था विवेक।

विवेक रोज़ चाय का एक कप मंगवाता, सामने सड़क को देखता और करीब आधे घंटे बाद बिना किसी से बात किए वापस चला जाता।

दुकानदार कई बार उससे पूछ चुका था—

“बेटा, रोज़ यहाँ अकेले बैठकर किसका इंतज़ार करते हो?”

विवेक मुस्कुराकर कह देता—

“जिसका इंतज़ार है, शायद उसे भी पता नहीं कि मैं उसका इंतज़ार कर रहा हूँ।”

दुकानदार उसकी बात सुनकर हँस देता।

लेकिन एक दिन विवेक की जिंदगी सचमुच बदल गई।

उस दिन शाम को अचानक तेज़ बारिश शुरू हो गई।

लोग इधर-उधर भागने लगे। चाय की दुकान के सामने भीड़ बढ़ गई।

तभी एक लड़की दौड़ती हुई दुकान के पास आकर रुक गई।

उसके हाथ में एक पुरानी किताब थी, जिसे वह बारिश से बचाने की कोशिश कर रही थी।

विवेक की नजर पहली बार उस लड़की पर पड़ी।

लड़की ने दुकानदार से पूछा—

“भैया, यहाँ थोड़ी देर खड़ी हो सकती हूँ?”

“हाँ बेटी, क्यों नहीं।”

लड़की दुकान के एक कोने में खड़ी हो गई।

कुछ देर बाद उसकी नजर विवेक की तरफ गई।

दोनों की नजरें मिलीं।

लड़की मुस्कुराई।

विवेक ने भी हल्की-सी मुस्कान दे दी।

बस इतना ही।

उस दिन दोनों के बीच कोई बातचीत नहीं हुई।

लेकिन अगले दिन विवेक जब छह बजे चाय की दुकान पर पहुँचा तो वह लड़की पहले से वहाँ बैठी थी।

विवेक थोड़ा हैरान हुआ।

लड़की ने मुस्कुराकर कहा—

“आज बारिश नहीं हो रही।”

विवेक ने पूछा—

“फिर आप यहाँ?”

लड़की ने किताब बंद की और बोली—

“कल बारिश ने यहाँ ला दिया था… आज शायद किस्मत लाई है।”

विवेक कुछ बोल नहीं पाया।

उस लड़की का नाम नैना था।

धीरे-धीरे दोनों की मुलाकातें रोज़ होने लगीं।

कभी चाय के बहाने बातचीत होती, कभी किताबों के बारे में।

नैना को पुराने उपन्यास पढ़ना पसंद था और विवेक को कहानियाँ लिखना।

एक दिन नैना ने पूछा—

“तुम कहानी क्यों लिखते हो?”

विवेक ने कहा—

“क्योंकि जिंदगी में जो बातें किसी से कह नहीं पाता, उन्हें कागज समझ लेता है।”

नैना कुछ पल चुप रही।

फिर उसने धीरे से कहा—

“तो कभी मेरे बारे में भी कहानी लिखना।”

विवेक ने मुस्कुराकर जवाब दिया—

“अगर तुम मेरी कहानी का हिस्सा बनोगी, तो जरूर लिखूँगा।”

उस दिन नैना ने कुछ नहीं कहा।

लेकिन उसके चेहरे पर आई मुस्कान ने विवेक को बहुत कुछ बता दिया।

समय गुजरता गया।

दोनों की दोस्ती कब प्यार में बदल गई, उन्हें खुद पता नहीं चला।

एक दिन विवेक ने नैना से कहा—

“मुझे तुमसे एक बात कहनी है।”

नैना ने हँसते हुए पूछा—

“क्या?”

“अगर मैं तुम्हें अपनी जिंदगी की सबसे जरूरी कहानी मान लूँ तो?”

नैना ने कुछ पल उसकी आँखों में देखा।

फिर बोली—

“तो मैं चाहूँगी कि उस कहानी का अंत मत लिखना।”

विवेक ने पूछा—

“क्यों?”

नैना ने कहा—

“क्योंकि कुछ कहानियाँ खत्म होने के लिए नहीं होतीं।”

दोनों चुप हो गए।

उस दिन पहली बार उन्हें एहसास हुआ कि उनका रिश्ता सिर्फ दोस्ती नहीं था।

लेकिन जिंदगी हमेशा कहानी की तरह आसान नहीं होती।

कुछ दिनों बाद नैना ने विवेक को बताया कि उसके परिवार ने उसकी शादी कहीं और तय कर दी है।

विवेक के पैरों तले जमीन खिसक गई।

उसने पूछा—

“क्या तुमने हाँ कह दी?”

नैना की आँखें नम थीं।

“नहीं।”

“फिर?”

“घर वाले मेरी बात सुनना नहीं चाहते।”

विवेक ने उसका हाथ पकड़ने के बजाय सिर्फ इतना कहा—

“मैं तुम्हें किसी मुश्किल में नहीं डालना चाहता। लेकिन अगर तुम मेरे साथ जिंदगी बिताना चाहती हो, तो इस बार हमें अपनी बात कहनी होगी।”

नैना ने पहली बार हिम्मत करके अपने परिवार से बात की।

शुरुआत में बहुत विरोध हुआ।

पर विवेक ने हार नहीं मानी।

उसने नैना के परिवार से कहा—

“मैं अमीर नहीं हूँ। मेरे पास बड़ी गाड़ी या बड़ा घर नहीं है। लेकिन मैं आपकी बेटी को सम्मान दूँगा और उसकी हर खुशी के लिए मेहनत करूँगा।”

नैना के पिता ने पूछा—

“क्या तुम्हें लगता है कि सिर्फ प्यार से जिंदगी चल जाती है?”

विवेक ने सिर झुकाकर कहा—

“नहीं। प्यार के साथ जिम्मेदारी भी चाहिए। और मैं दोनों निभाने के लिए तैयार हूँ।”

कुछ दिनों तक कोई जवाब नहीं मिला।

फिर एक शाम नैना के पिता उसी चाय की दुकान पर आए।

विवेक उन्हें देखकर घबरा गया।

उन्होंने चुपचाप उसके सामने बैठकर कहा—

“तुम रोज़ यहाँ क्यों आते थे, पता है?”

विवेक चौंका।

“क्यों?”

उन्होंने कहा—

“नैना से मिलने से पहले भी तुम यहाँ आते थे। तुम्हें शायद पता नहीं, लेकिन हम तुम्हें कई बार देख चुके थे।”

विवेक चुप रहा।

फिर नैना के पिता मुस्कुराए।

“हमें तुम्हारी दौलत नहीं चाहिए। हमें बस यह भरोसा चाहिए था कि तुम मेरी बेटी को कभी अकेला नहीं छोड़ोगे।”

विवेक की आँखें भर आईं।

कुछ महीनों बाद दोनों परिवारों की सहमति से विवेक और नैना की शादी हो गई।

शादी के बाद एक शाम दोनों उसी पुरानी चाय की दुकान पर पहुँचे।

दुकानदार ने उन्हें देखकर हँसते हुए कहा—

“अरे! आज तो दोनों साथ आए हो।”

नैना ने मुस्कुराकर कहा—

“अब इंतज़ार खत्म हो गया।”

विवेक ने चाय का कप उठाया और बोला—

“नहीं, इंतज़ार खत्म नहीं हुआ।”

नैना ने हैरानी से पूछा—

“अब किसका इंतज़ार?”

विवेक मुस्कुराया।

“उस दिन का, जब मैं तुम्हारे लिए लिखी अपनी पहली कहानी तुम्हें पढ़ाऊँगा।”

नैना ने पूछा—

“कहानी का नाम क्या होगा?”

विवेक ने उसकी तरफ देखकर कहा—

“बारिश में मिली वह लड़की।”

नैना हँस पड़ी।

बाहर फिर बारिश शुरू हो चुकी थी।

वही सड़क थी।

वही चाय की दुकान थी।

लेकिन इस बार दोनों के बीच कोई दूरी नहीं थी।

कभी-कभी जिंदगी में कोई इंसान अचानक बारिश की तरह आता है।

हम सोचते हैं कि वह बस कुछ देर के लिए आया है।

लेकिन वही इंसान धीरे-धीरे हमारी पूरी जिंदगी की सबसे खूबसूरत कहानी बन जाता है।

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