Danendra 06 Jul 2025 कहानियाँ समाजिक 22365 0 Hindi :: हिंदी
राजू एक होशियार और मेहनती लड़का था। गाँव के स्कूल में वह हमेशा अव्वल आता, माँ-बाप का सपना था कि वह बड़ा आदमी बने। लेकिन जब वह शहर की पढ़ाई के लिए निकला, तो उसका जीवन एक मोड़ पर आकर थम गया। शहर में नए दोस्त मिले। शुरू में सब ठीक था, लेकिन धीरे-धीरे पार्टी, सिगरेट और शराब उसका हिस्सा बन गए। "थोड़ा ही तो है", उसने खुद से कहा। फिर "थोड़ा" हर दिन बढ़ने लगा। एक दिन, उसका सबसे अच्छा दोस्त दीपक उसके कमरे में आया। राजू ने उसे शराब ऑफर की। दीपक मुस्कराया और बोला, "राजू, एक बात बताऊँ?" "हाँ, बोलो", राजू ने बोतल उठाते हुए कहा। दीपक ने जेब से एक कागज़ निकाला। "ये देखो, ये तुम्हारी माँ का पत्र है। उन्होंने मुझे भेजा है, क्योंकि उन्हें लगता है तुम बदल गए हो।" राजू ने कांपते हाथों से पत्र पढ़ा: > "बेटा, जब तू बड़ा हो रहा था, तुझे ज़ुकाम भी होता था तो मैं रातभर जागती थी। आज पता चला है कि तू नशे में डूब रहा है। तूने हमें नहीं खोया, तू खुद को खो रहा है।" राजू की आँखों में आँसू आ गए। उसने धीरे से शराब का गिलास देखा, फिर दीपक से पूछा, "अगर मैं इस गिलास में ज़हर मिला दूँ, तो क्या तुम पियोगे?" दीपक चौंक गया, "पागल हो क्या! नहीं!" राजू बोला, "तो फिर ये ज़हर मैं क्यों पी रहा हूँ हर रोज़?" और उसी पल, उसने शराब की बोतल उठाई और बाहर सड़क पर फेंक दी। उस दिन के बाद राजू ने नशे को हमेशा के लिए छोड़ दिया। वह जान गया था — नशा ही नाश है।