arti singh 18 Jun 2023 कहानियाँ प्यार-महोब्बत फूलो और फूलो की देख रेख करने वाले कि कहानी । 15753 0 Hindi :: हिंदी
By arti singh
मेरी एक दोस्त हैं जो इन दिनों ससुराल में है ,जो फूलों को छोटेपन से ही सींच -सींच कर बड़ा करती हैं ,और जब उनके खिलने की बारी आती है, तब तक उनकी शादी हो जाती है .!! और अपनी देख -रेख करने वाले के प्रति किसको चाहत नही होती है.. इसलिए शायद वो भी दुखी हुए..और ये मैने तब महसूस किया, जब वो अपने खिलने के मौसम में भी ना खिल सके।और तब मैंने महसूस किया इन दुखी फूलो का दर्द .
जो आगे आप पढ़ने जा रहे..
जिस दिन से जुदा वो उनसे हुईं
फूलो ने खिलना छोड़ दिया।
चमेली का मुँह उतरा उतरा ।
अपराजू ने जीना छोड़ दिया।।
आगे पढियेगा...
वो पास जो इनके रहती थीं
बेऋतु ही हरे हो जाते थे,
अब लाख बहारे आयें तो, क्या
फूलो ने खिलना छोड़ दिया।।
चूंकि जहाँ दोस्त का कमरा था,फूल वहाँ से दिखते थे।
और अब फूलो के बोल.. जो वो महसूस करते थे....
आता भी नही..अब साथी कोई ,
शालिनी ,दीपिका या आरती, कोई..
याद पुरानी ही रुला रही
हम फूलो को सुखा रही,
अब फूल खिले ज़ख़्मों पे क्या
अब फूल हरे रह करें भी क्या,
इसलिए...फूलो ने खिलना छोड़,
दिया..। आरती से भी मुँह मोड़ लिया..
धन्यवाद..🙏