धर्मेन्द्र कुमार 03 Apr 2023 कहानियाँ समाजिक कहानी गुमनाम तालाब की , यात्रावृतान्त 37304 0 Hindi :: हिंदी
"गुमनाम तालाब"
एक बार की बात है | मैं और मेरा दोस्त कहीं घूमने के लिए जाना चाहते थे , आज कल ऐसे करते करते एक दिन वह समय आ गया, हम दोनों ने यह भी तय नहीं किये की , कहा घूमने चलना हैं |रविवार की छुट्टी थी, हम दोनों लोग अपने कमरे से निकल पड़े घूमने के लिए , और हम दोनों ने मुस्करा बस स्टैंड पर गए ,और वहाँ से बस पर बैठे और वहाँ से टिकट लिए चरखारी के लिए , टिकट 37 - 37 ₹ की थी| मुस्करा से चारखारी की दूरी 35 किलोमीटर था | बस चल पड़ी और हम दोनों लोग बस पर बैठे - बैठे बात कर रहे हैं | की महोबा चले की, चरखारी, दोनों लोगों में कन्फर्म नहीं हों पा रहा था | की कहा चले, बस ऐसे सोचते - सोचते चरखारी बस स्टैंड आ गये, कंडेक्टर बोला चरखारी वाले उतर जाओ भाई, हम दोनों लोग उतर गये , वही पर अब वहाँ से कहा जाए यही सोंच रहे थे | फिर वहाँ पूछने पर पता चला की, यहाँ कोई तालाब हैं, जो चार तालाबों का समूह हैं, इन तालाबों का पानी एक समान बराबर रहता हैं, हम दोनों ने तय किया की यही तालाब ही देखने चलते हैं |
हम ने फोन में लोकेशन देखा तो हम लोग जहाँ पर थे, वहाँ से तालाब की दूरी 1.2 किलो मीटर था | हम दोनों ने पैदल ही चल दिये लगभग दोपहर के 11 बज रहे थे ,धूप तेज थी, कुछ दूर जाने के बाद प्यास लगने लगी | कुछ दूर आने के बाद एक पहाड़ों के बगल में एक गोमती दिखी, वहाँ पर गए पानी पीने लगे तो, देखा की वहाँ एक पन्ने पर लिख कर टगा रखा था,की लस्सी 30 ₹ प्रति गिलास हैं |हमारा मन हुआ की गर्मी जादा है ठंडी ठंडी लस्सी पी ले, तो हमने अपने साथी से कहा कु आओ लस्सी पिया जाय, दोनों लोग वहीं पर बैठे कर लस्सी पीने लगे और थोड़ा आराम करने के बाद, वहाँ से फिर चल दिए, कुछ दूर जाने के बाद एक आदमी से पूछने पर पता चला की अभी तलाब की दूरी 800 मीटर है
धूप बढती ही जा रही थी, फोन पर सर्च करने पर पाता चला की वह तालाब का नाम " गुमनाम बिहारी तालाब " था
पर उस तालाब की दूरी बढती ही जा रही थी , जो दूरी 1.2 किलोमीटर दिखा रहा था अब वह 2.3 किलोमीटर दिखाने लगा था
हम दोनों लोग के धूप के कारण थकान लग गयी थी | लक्ष्य को दूर होते देख और भी थकान लगने लागी थी , फिर भी अन्दर घूमने कि ललक सारी थकान एक मिनट में दूर कर दी हक आगे बढ़ने लगे
कुछ दूर आने के बाद एक आदमी से पूछने पर बोला यह रास्ते से जाओ तो तालाब जल्द ही मिल जायेगा, हमनें निर्णय किया की इसी रास्ते से चलते हैं |
कुछ दूर आने पर हमें एक तालाब दिखा हम दोनों लोग उस तालाब के किनारे लगे पीपल के पेड़ के नीचे जा कर बैठ गये उसी तालाब में कुछ बच्चे नहा रहे थे, वैसे तो वह गुमनाम तलाब नहीं था पर वह तालाब बहुत बड़ा था,उस तालाब का नाम "कोठी ताल चरखारी " के नाम से जाना जाता था,फिर हम कुछ आराम करने के बाद वहा से उसी तालाब के किनारे किनारे आगे बढे, कुछ दूर आने पर उसी तालाब के बीच में पार्क बना था, जो पं. दीनदयाल उपाध्याय पार्क के नाम से जाना जाता था |
हम दोनों लोग उसी पार्क में जा कर बैठे रहें लगभग दो घंटे तक फिर वहाँ से चले और आगे बढे तालाब के किनारे किनारे तालाब तो वही सभी दिख रहे थे जो चार तालाबों का समूह था, पर जो नाम सुना था उस नाम का तालाब नहीं दिखा पानी भी चारों तालाबों का एक समान और बराबर थे हमे लग रहा था की हो नाह हो यह वही गुमनाम बिहारी तालाब है , फिर हम कुछ आगे आये तो हमें बस दिख गई हमनें बस पकड़ी और कमरे पर चले आये....... "
"गुमनाम बिहारी तालाब का नाम ही सुने रह गये पर उस नाम का तालाब नहीं मिला "
"गुमनाम तालाब कही गुमनाम हो गया"