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माँ की दुआ और बद्दुआ

महेश्वर उनियाल उत्तराखंडी 21 Jun 2026 कहानियाँ समाजिक #माँ की #दुआ और #बद्दुआ 3288 0 Hindi :: हिंदी

कहानी

“माँ की दुआ और बद्दुआ ” 

शंकर मल्होत्रा एक कंपनी के मालिक हैं जिनका कारोबार देश-विदेश तक फैला हुआ है उनके पास इतनी संपत्ति है कि उन्हें भी ठीक से अंदाजा नहीं है, किंतु खुद भारत में ही अपनी कंपनी के कार्य को देखने और संचालित करने के लिए ऑफिस बनाकर रहते हैं स्वभाव के अत्यधिक मिलनसार व मददगार है जिसके लिए अपने ही शहर में उन्होंने एक वृद्ध आश्रम खोल रखा है इसमें तमाम ऐसे माता-पिता जिनको उनकी संतान ने घर से निकाल दिया हो को अपने आश्रम में पनाह देते हैं और स्वयं भी उनकी सेवा करते हैं|
शंकर मल्होत्रा के शहर में एक रोहित नाम का लड़का है जो अपने माता-पिता की इकलौती संतान है तथा पिता के देहांत के बाद उसकी माता ने उसे बड़ी कठिनाई और मेहनत करके पाला है और उसकी शादी भी करवा दी हैए अब तो उसके एक बेटा भी है रोहित बेरोजगार है जिस कारण अभी भी उसकी मां ही घर का खर्च वहन करती है द्य धीरे.धीरे रोहित की माता और बूढ़ी होती जा रही है इस कारण अब घर में रोहित और उसकी पत्नी को बोझ लगने लगती है रोहित कुछ कमाता नहीं है इसलिए मां को उसकी संपत्ति के लालच में साथ रखना मजबूरी है रोहित की माँ उसके लिए काम के साथ-साथ ईश्वर से दुआ प्रार्थना भी करती है कि मेरे रोहित की नौकरी लग जाए एक दिन जैसे ही रोहित की मां पूजा अर्चना करके मंदिर से वापस घर को लौट रही थी कि रास्ते में उसे अखबार वाला जबरदस्ती अखबार पकड़ा गया जिसको वह घर लेकर आती है और अखबार में लपेटे प्रसाद को बांट कर अखबार को मेज पर छोड़ देती है इतने में रोहित की नजर अचानक अखबार में छपे विज्ञापन पर पड़ती है जिसमें किसी कंपनी में एक अच्छी पोस्ट निकली है जहां पर केवल एक ही सीट खाली है बस फिर देर किस बात की रोहित ने अपने सारे शिक्षण अभिलेख तैयार कर इंटरव्यू के लिए तैयारी करनी शुरू कर दी और रोहित इंटरव्यू के लिए जा रहा था तो उसकी मां मन ही मन ईश्वर से दुआ कर रही थी कि मेरे बेटे की नौकरी लग जाए रोहित इंटरव्यू के लिए दिए गए पते पर पहुंचता है और वहां हजारों की संख्या में खड़े अभ्यर्थियों की लाइन में खड़ा हो जाता है जबकि चयन केवल एक का ही होना है आखिर रोहित की बारी आ ही जाती है और जब इंटरव्यू के लिए उससे सवाल पूछे जाते हैं तो पहला सवाल यह रहता है कि आपकी प्राथमिकता क्या है तो अचानक रोहित के मुंह से निकल जाता है कि माता-पिता की सेवा करना
शायद यह जवाब उसके लिए बनावटी ही था किंतु इंटरव्यू लेने वाले व्यक्ति को यह जवाब पूरी तरह झकझोर देता है जो कि आज शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति हो जो माता पिता की सेवा को अपनी प्राथमिकता रखता हो सवाल का जवाब सुनकर इंटरव्यू ले रहे व्यक्ति ने रोहित से बस इतना कह कर कि आप कल से ज्वाइन कर सकते हैं बाहर जाने को कहा रोहित तो अपने मनमाफिक नौकरी मिल जाने के कारण खुशी से फूले नहीं समा रहा था और इंटरव्यू वाले कमरे से बाहर निकलते ही रोहित अपनी पत्नी शीला को फोन करता है और कहता है जानू ,एक बहुत बड़ी खुशखबरी है और शीला भी उत्सुक होकर सुनने के लिए आतुर हो जाती है और जब सुनती है कि रोहित को नौकरी मिल गई है तो खुशी से उछलने लगती हैं इसी खुशी को सेलिब्रेट करने के लिए रोहित कहता है जानू, आज हम रात का खाना घर पर नहीं बल्कि किसी रेस्टोरेंट में खाएंगे और रोहित की मां बेटे की नौकरी लगने की खबर को चुपके से सुन लेती है और उसकी आंखों में खुशी के आंसू आ जाते हैं और सोचती है कि शायद रोहित वापस घर आते समय अपनी मां के लिए कुछ सरप्राइस गिफ्ट लेकर आ सकता है किंतु जब रोहित घर वापस लौटता है तब शीला यानी उसकी पत्नी बाहर होटल में खाना खाने के लिए तैयार हो चुकी है और गेट से ही रोहित अपनी पत्नी और बेटे को लेकर होटल के लिए चल देते हैं और घर पर चुल्हा तक नहीं जलता है और उनको वृद्ध मां तक का ख्याल नहीं आता है|
होटल में खाना खाते वक्त रोहित और उसकी पत्नी मां से दूर होने के लिए उसे वृद्ध आश्रम छोड़ने की प्लानिंग बनाते हैं और रोहित कहता है कि चलो मैं जब कल नौकरी ज्वाइन करने के लिए जाऊंगा तो मेरे ऑफिस के ही नजदीक एक वृद्ध आश्रम है उसमें मां को भी छोड़ आऊंगा जबकि रोहित की वृद्ध मां को इसकी कोई खबर नहीं है देर रात जब रोहित अपने परिवार के साथ घर वापस आ जाता है तब उसकी मां सो चुकी होती है किंतु जब सुबह उसकी आंख खुलती है तो रोहित को सूट व टाई बांधे सामने खड़ा देखती हैं और सोचती है कि नौकरी का पहला दिन है शायद मां का आशीर्वाद लेने आया है तभी रोहित कड़े स्वर मैं कहता है|
मां तू अभी तक सो रही है जल्दी उठ तैयार हो जा जिस पर मां उत्सुकता से पूछती है कि बेटा क्यों कहां जाना है मुझे तभी रोहित फिर कहता है कि मां हम घूमने जा रहे हैं मैं आपको एक बहुत अच्छी जगह ले कर जा रहा हूं जहां आपको कोई परेशानी नहीं होगी रोहित की मां खुशी.खुशी तैयार हो जाती है और बाहर खड़ी टैक्सी में बैठ जाती है कुछ देर पश्चात रोहित व उसकी माँ वृद्ध आश्रम के गेट पर पहुंचते हैं जहां पर बहुत सारे वृद्ध लोग घूम रहे होते हैं रोहित मां को गेट पर रुकने के लिए कहकर खुद अंदर चला जाता है रोहित की मां गेट पर खड़े एक बुजुर्ग व्यक्ति से उस जगह के बारे में पूछती है तो वह व्यक्ति उसे वहां की सारी सच्चाई बता देता है अब रोहित की मां सब कुछ समझ जाती है तथा रोहित और उसकी पत्नी के सारे मंसूबे उसे मालूम हो जाते हैं किंतु अब उसके हाथ में कुछ नहीं है वह तो केवल ईश्वर से ही प्रार्थना कर सकती है रोहित अपनी मां को आश्रम में भर्ती कराने संबंधी कागज तैयार करने अंदर ऑफिस में जाता है जहां पर वह सारी औपचारिकताएं पूरी करता है और बस एक आखिरी हस्ताक्षर आश्रम के मालिक से करवाने के लिए उसे उनके कार्यालय हेतु ऊपरी मंजिल पर भेज दिया जाता है रोहित आश्रम के मालिक के ऑफिस में पहुंचकर जैसे ही दरवाजे से अंदर प्रवेश करता है तो लकड़ी की मेज के पीछे गद्देदार घूमती हुई कुर्सी में बैठा व्यक्ति उसका वेलकम जेंटलमैन कहता हुआ स्वागत करता है और उसे एक कुर्सी निकाल कर बैठने का ऑफर देता है रोहित उस व्यक्ति को पहचान तो लेता है किंतु यह सोच कर कि शायद आज कल की तेज भागती जिंदगी में किसी को कहां याद रहता है और अपने बैग से फाइल को बाहर निकालकर यह कहते हुए मेज पर रख देता है कि सर थोड़ा जल्दी कीजिए मुझे लेट हो रही है कुर्सी पर बैठा व्यक्ति रोहित की फाइल को सरसरी निगाह से देखता है और फिर बंद कर देता है रोहित फिर से कहता है कि सर प्लीज थोड़ा जल्दी कीजिए इतने में वो व्यक्ति रोहित की ओर देखते हुए बोलता है कि तुम्हारा नाम रोहित है! रोहित. जी हां और तुमने कल किसी कंपनी के लिए इंटरव्यू दिया था रोहित. जी हां पर आप यह सब क्यों पूछ रहे हो कुर्सी पर बैठा व्यक्ति रोहित की और घृणा भरी निगाह से देखते हुए कड़े स्वर में कहता है रोहित तुम बहुत गिरे हुए इंसान हो तुमने तो कहा था कि तुम्हारी प्राथमिकता माता- पिता की सेवा करना है और झूठ बोलकर नौकरी पाने पर अपनी माता को वृद्धाश्रम छोड़ रहे हो |
मेरा नाम शंकर मल्होत्रा है! जिस कंपनी में तुमने कल इंटरव्यू दिया था वह मेरी कंपनी है और उसका मालिक मैं हूं और इस आश्रम का मालिक भी मैं ही हूं अच्छा हुआ तुम जैसे दोगले इंसान का पता चल गया अन्यथा तुम तो कुछ भी कर सकते थे अब मैं तुमको अपनी कंपनी में कभी नौकरी नहीं दूंगा गेट आउट !!!
यह सब देख कर रोहित के होश उड़ जाते हैं और तुरंत शंकर मल्होत्रा के पैरों में गिरकर गिड़गिड़ाने लगता है और माफी मांगने लगता है सर मुझे माफ कर दीजिए मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई है शंकर मल्होत्रा रोहित को कहता है कि माफी मुझसे नहीं तुम्हें अपनी मां से मांगनी चाहिए जिनकी दुआओं से तुम नौकरी के काबिल बन सके और आज उस मां की बद्दुआ से तुम फिर अपना सब कुछ खोने कि कगार पर हो इतने में रोहित की मां रोहित को ढूंढते.ढूंढते ऑफिस में आ जाती है जहां पर उसे सब कुछ पता चल जाता है और वह भी रोहित के लिए शंकर मल्होत्रा से माफ करने को कहती है और मां के कहने पर शंकर मलहोत्रा भी रोहित को माफ कर देता है । अब रोहित को अपनी गलती का एहसास हो जाता है और अपनी मां से वादा करता है कि वह कभी भी उसे कोई कष्ट नहीं देगा और फिर दोनों वापस अपने घर को लौट आते हैं ||
लेखक- महेश्वर उनियाल उत्तराखण्डी ।

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