Join Us:
दिशा-लाइव ग्रुप ने लॉन्च किया नया ब्रांड BizPry - लोकल से ग्लोबल तक 20 मई स्पेशल -इंटरनेट पर कविता कहानी और लेख लिखकर पैसे कमाएं - आपके लिए सबसे बढ़िया मौका साहित्य लाइव की वेबसाइट हुई और अधिक बेहतरीन और एडवांस साहित्य लाइव पर किसी भी तकनीकी सहयोग या अन्य समस्याओं के लिए सम्पर्क करें

“दो दुनियाओं के बीच”

Mashayel najm 21 Feb 2026 कहानियाँ बाल-साहित्य बाल साहित्य नैतिक कहानी भावनात्मक कहानी प्रेरणादायक कहानी परिवार की कहानी माता-पिता औरदिल को छू लेने वाली कहानी हिंदी लघुकथा जीवन की सीख सामाजिक कहानी बच्चों की सीख परिवार का महत्व बच्चे पीढ़ियों का अंतर 12411 0 Hindi :: हिंदी

यूसुफ और अलीज़ा अक्सर अपने कमरे में बैठकर बातें करते थे।

“काश हम मम्मी-पापा के समय में पैदा होते…”
अलीज़ा ने मोबाइल स्क्रीन देखते हुए कहा,
“तब न इतना प्रेशर था, न सोशल मीडिया, न हर समय तुलना।”

यूसुफ ने सिर हिलाया,
“हाँ… पापा कहते हैं उनका बचपन कितना अच्छा था। न टेंशन, न भागदौड़… बस सादगी।”

उसी शाम पापा पुराने एलबम निकालकर बैठे थे।
काले-सफेद तस्वीरों में मिट्टी से सने पैर, पतंग, साइकिल और दोस्तों की टोली दिख रही थी।

पापा मुस्कुराए,
“हमारे समय में कम चीज़ें थीं… लेकिन सुकून ज़्यादा था।”

मम्मी ने भी कहा,
“एक खिलौना सालों चलता था… एक दोस्ती उम्रभर।”

बच्चों ने एक-दूसरे को देखा।
उन्हें लगा — शायद सच में वो समय बेहतर था।

लेकिन उसी रात अचानक बिजली चली गई।
वाई-फाई बंद… मोबाइल की बैटरी भी खत्म।

यूसुफ चिढ़कर बोला,
“अब क्या करें?”

पापा हँसे,
“चलो छत पर चलते हैं।”

सब छत पर बैठ गए। आसमान साफ था। तारे चमक रहे थे।
पापा ने कहा,
“हमारे पास मोबाइल नहीं था… इसलिए हम आसमान पढ़ते थे।”

मम्मी बोलीं,
“हमारे पास गेम नहीं थे… इसलिए हम एक-दूसरे से खेलते थे।”

कुछ देर बाद अलीज़ा ने धीरे से पूछा,
“लेकिन पापा… तब सपने पूरे करना भी मुश्किल रहा होगा?”

पापा की मुस्कान थोड़ी गंभीर हो गई।
“हाँ बेटा, मुश्किल था। किताबें कम थीं, मौके कम थे… पर हौसले ज़्यादा थे।”

यूसुफ ने पहली बार महसूस किया —
हर समय की अपनी लड़ाई होती है।

आज बच्चों के पास सुविधाएँ हैं…
पर प्रतिस्पर्धा भी है।
तब सादगी थी…
पर संघर्ष भी था।

अचानक अलीज़ा ने मम्मी का हाथ पकड़ लिया।
“शायद हर दौर अच्छा होता है… अगर हम उसे अच्छे से जी लें।”

पापा ने सिर हिलाया,
“बिल्कुल। हमारा समय सादा था, तुम्हारा समय तेज है।
हमने सादगी में खुश रहना सीखा…
तुम्हें तेज़ी में सुकून ढूँढना सीखना है।”

उस रात पहली बार चारों बिना मोबाइल के देर तक बातें करते रहे।

यूसुफ ने सोने से पहले डायरी में लिखा —
"दुनिया बदलती रहती है,
लेकिन परिवार का साथ हर दौर को खूबसूरत बना देता है।"

Comments & Reviews

Post a comment

Login to post a comment!

Related Articles

बहुत समय पहले की बात है रहमान चाचा के यहाँ एक चूहा रहता था. हर दिन की तरह उस दिन भी बाज़ार से गाँव लौटते वक़्त चाचा झोले में कुछ सामान लेकर � read more >>
सच्चे भाई सुबह की योगा क्लास लेने के बाद मैं पार्क से होते हुए बाजार वाली रोड पर सैर के लिए निकल पड़ी । सुबह के व� read more >>
लड़का: शुक्र है भगवान का इस दिन का तो मे कब से इंतजार कर रहा था। लड़की : तो अब मे जाऊ? लड़का : नही बिल्कुल नही। लड़की : क्या तुम मुझस read more >>
Join Us: